
संविलियन को लेकर शिक्षाकर्मियों में जगी आस, जब राजस्थान से लौटी चार सदस्यीय टीम
रायपुर . राजस्थान में शिक्षाकर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं का अध्ययन कर सरकार की ओर से गठित चार सदस्यीय टीम वापस लौट आई है। टीम के राजस्थान दौरे से शिक्षाकर्मियों में एक नई उम्मीद जगी है। शिक्षाकर्मियों ने सरकार से मांग की है कि सरकार राजस्थान के नियमों को सार्वजनिक कर संविलियन की घोषणा करें।
छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि संघ ने राजस्थान में संविलियन के लिए बनाए गए नियम व प्रावधान का सम्पूर्ण तथ्यात्मक दस्तावेज शासन को सौप चुका है। अब तो शासन की टीम भी दौरा करके वापस आ चुकी है। मुख्यमंत्री को तत्काल संविलियन की घोषणा करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में प्राथमिक शिक्षा व उच्च प्राथमिक शिक्षा में पंचायत विभाग में नियुक्तशिक्षक संवर्ग को 5 वर्ष की परिवीक्षा अवधि बाद शिक्षा विभाग में शिक्षकों के समान वेतनमान व सम्पूर्ण सेवा शर्तों के साथ रिक्तपदों पर संविलियन किया जाता है। वर्तमान में परिवीक्षा अवधि को 2 वर्ष कर दिया गया है।
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उन्होंने बताया कि समायोजन के बाद कार्मिक को पंचायती राज में न गणना कर शिक्षा विभाग मे गिना जाता है व शिक्षा विभाग के समस्त परिलाभ भी दिया जाता है। राजस्थान शिक्षा अधीनस्थ सेवा नियम 1971 के नियम 6 क के तहत पंचायती राज के तृतीय श्रेणी अध्यापको को सेटअप परिवर्तन कर शिक्षा विभाग में लेने का नियम बनाया गया है।
मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक 24 को
संविलियन को लेकर सरकार से रवैया से नाराज शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा 24 अप्रैल को राजधानी में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। इसमें मोर्चा से जुड़े सभी पांच संघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मोर्चा के प्रदेश संयोजक वीरेन्द्र दुबे ने बताया कि बैठक में संविलियन की मांग को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी और सभी की सहमति से आंदोलन के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
Published on:
23 Apr 2018 01:30 pm
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