रायपुर

Chhattisgarh News: स्मोकिंग और दूषित हवा से कमजोर हो रहे फेफड़े, कम उम्र में बढ़ रहा लंग्स कैंसर का खतरा, जानें स्वस्थ रखने के टिप्स

Lung Cancer Risk: स्मोकिंग और बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा असर फेफड़ों की सेहत पर पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र में भी फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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Sep 25, 2026
Chhattisgarh News
लंग्स कैंसर (फोटो सोर्स- Unsplash)

रायपुर@पीलूराम साहू। World Lung Day: स्मोकिंग व दूषित हवा फेफड़े के सबसे बड़े दुश्मन है। इसके असर से अब 30 से 35 साल के लोग भी लंग्स कैंसर का शिकार हो रहे हैं। भारत ही नहीं दुनिया में नवजातों की सबसे ज्यादा मौत निमोनिया से हो रही है। निमोनिया यानी फेफड़े का सिवियर संक्रमण। डॉक्टरों के अनुसार फेफड़े शरीर का अतिसंवेदनशील अंग है। इसे सहेजना हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी है।

विश्व लंग्स डे 25 सितंबर को है। इस मौके पर पत्रिका ने चेस्ट एक्सपर्ट से बातचीत की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। फेफड़े संक्रमित होने से टीबी बीमारी भी होती है। स्मोकिंग की लत आने वाले दिनों में लंग्स कैंसर का रूप ले ले रहा है। आंबेडकर व निजी अस्पतालों में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में इलाज कराने वाले 20 से 25 फीसदी स्मोकिंग वाले होते हैं।

ओपीडी में 150 में 30 मरीज होते हैं स्मोकिंग करने वाले

आंबेडकर अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 150 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसमें 30 मरीज स्मोकिंग के आदी हैं। ऐसे मरीजों का जब पल्मोनरी फंक्शनल टेस्ट (पीएफटी) किया जाता है तो फेफड़े की बीमारी निकलती है। डॉक्टर जब मरीज से हिस्ट्री पूछते हैं तो पता चलता है कि गांव से आया मरीज 15-16 साल की उम्र से बीड़ी पी रहा है। वहीं शहरी मरीज 18 साल की उम्र में सिगरेट का आदी होने लगा है।

घर व बाहर प्रदूषण फेफड़ों पर भारी

फेफड़ों काे कमजोर करने के लिए इनडोर व आउटडोर प्रदूषण भी काफी हद तक जिम्मेदार है। इनडोर प्रदूषण में मॉस्किटो क्वाइल व पेंट आदि शामिल है। एसी की हवा भी कुछ हद तक फेफड़ों को कमजोर कर रही है। दरअसल कई घरों में पर्याप्त खिड़कियां नहीं होती। इसलिए घर की हवा बाहर नहीं निकल पाती। ये हवा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार वाहनों के धुएं व धूल से भी फेफड़ों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

फेफड़ों को इस तरह रखें स्वस्थ

  • स्मोकिंग छोड़ने से फेफड़ों को डिटाक्स करने में मदद मिलती है।
  • गहरी सांस लेना यानी प्राणायाम व डीप ब्रीथिंग।
  • विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, आंवला, नींबू, हल्दी, अदरक, ग्रीन टी से फायदे।
  • सुबह या समय मिलने पर नियमित व्यायाम।
  • हफ्ते में 2-3 बार भाप लेने से बलगम निकलता है और सांस लेने में आसानी।

टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन, आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, लंग्स को नुकसान पहुंचाने में स्मोकिंग व दूषित हवा सबसे बड़ा कारण है। घर व बाहर प्रदूषण भी फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। स्माेकिंग के कारण अब 30 से 35 साल के युवाओं के फेफड़े खराब होने लगे हैं। ओपीडी में करीब 20 से 25 फीसदी मरीज स्मोकिंग से बीमार होकर आते हैं। पीएफटी में फेफड़े की बीमारी का पता चलता है।

Updated on:
25 Sept 2026 01:30 pm
Published on:
25 Sept 2026 01:30 pm