रायपुर

Guest Editor: 10 गांवों की महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, बेटियों की पढ़ाई भी संवारी

सोच: महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सबसे पहले उसे अपने अधिकारों, शिक्षा और हुनर से जोडऩा जरूरी है।
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Updated: 31 Oct 2026, 7:48 PM IST
Guest Editor

Guest Editor: एक सिलाई मशीन, थोड़ा-सा प्रशिक्षण और आगे बढऩे का हौसला... कई महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह यहीं से शुरू हुई। किसी के हाथ में रोजगार का हुनर आया तो किसी बेटी को आर्थिक तंगी के कारण छूटी पढ़ाई दोबारा शुरू करने का मौका मिला। बीते 12 वर्षों से रायपुर की समाजसेवी साधना दुग्गड़ इसी बदलाव की कोशिश में जुटी हैं। उन्होंने अपने संगठन 'अर्पण सेवा समिति' के माध्यम से 10 गांवों की सैकड़ों महिलाओं को रोजगार से जोडऩे के साथ लड़कियों की शिक्षा की जिम्मेदारी भी उठाई है।

साधना ने वर्ष 2013 में महिलाओं और बेटियों के लिए अपना पूरा समय समर्पित करने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि लड़कियों की शिक्षा केवल एक व्यक्ति का भविष्य नहीं संवारती, बल्कि स्वस्थ समाज और सशक्त परिवार की नींव रखती है। इसी सोच के साथ उन्होंने जरूरतमंद लड़कियों को कंप्यूटर शिक्षा दिलाने से काम शुरू किया। आर्थिक संकट के कारण स्कूल या कॉलेज छोड़ चुकी कई बेटियों की फीस भरकर उन्हें दोबारा पढ़ाई से जोड़ा।

संदेश: बदलाव किसी एक बड़े प्रयास से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कामों को लगातार करते रहने से आता है। उनका लक्ष्य महिलाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वे आर्थिक तंगी, घरेलू हिंसा या सामाजिक चुनौतियों के सामने बेबस न रहें, बल्कि अपने जीवन के फैसले खुद ले सकें।

30 महिलाओं की बचत की सेवा: अर्पण महिला मंडल की खासियत यह है कि 12 वर्षों के सेवा कार्यों के दौरान सरकार से कोई आर्थिक सहयोग नहीं लिया। समूह की करीब 30 महिलाएं हर महीने अपनी ओर से राशि जमा करती हैं। इसी सामूहिक बचत से ग्रामीण महिलाओं के प्रशिक्षण, रोजगार और शिक्षा संबंधी जरूरतों पर खर्च किया जाता है।

हुनर से रोजगार तक पहुंच रहीं महिलाएं: साधना का काम केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, उनका प्रयास है कि महिलाएं हुनर सीखने के बाद कमाई भी कर सकें। हाल ही में रायपुर के आसपास के गांवों की 10 महिलाओं को एक महीने तक क्रोशिया का प्रशिक्षण दिया गया। अब ये महिलाएं इससे सजावटी और उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही हैं, जिन्हें दीपावली पर प्रदर्शनी के माध्यम से बेचने की तैयारी है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण लेने वाली महिलाएं अब अपने गांव में दूसरी महिलाओं को भी यह हुनर सिखा रही हैं। इसी तरह अभनपुर के आसपास के सातपारा, बेलभाटा, नायक, बांधा, झांकी और केंद्री गांव की महिलाओं और लड़कियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया।