
रायपुर@पीलूराम साहू। Weather Change: प्रदेश से मानसून की विदाई हो चुकी है और दिन व रात के तापमान में काफी अंतर से लोग बीमार पड़ने लगे हैं। शुक्रवार को दिन-रात के तापमान में 11 डिग्री का अंतर रहा। इससे आंबेडकर समेत निजी अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश, वायरल के 25 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। इन दिनों ज्यादातर घरों में लोग सीजनल बीमारी से पीड़ित हैं। अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतार है। डॉक्टरों के अनुसार खानपान में ऐहतियात बरतकर बीमार होने से बचा जा सकता है।
मानसून की विदाई के बाद मौसम ने अपना मिजाज बदलना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप व गर्मी का अहसास हो रहा है, जबकि रात होते ही ठंडक बढ़ने लगी है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच 11 डिग्री तक का अंतर लोगों की दिनचर्या के साथ शरीर के तापमान संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है। यह बदलाव संक्रमण काल का संकेत है, जिसमें दिन और रात के तापमान में लगातार अंतर बना रहता है।
ऐसे में जरा सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ रही है। इन दिनों मौसम शुष्क बना हुआ है, कोई सिस्टम भी नही है, नमी पूरी तरह से गायब है। इसके कारण दिन में सूरज की तीखी धूप लोगों को बेहाल कर रही है। शहर के तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दो दिनों तक बादल छाए रहे, जिससे लोग बीमार पड़ रहे है। अब मौसम शुष्क हो गया है, जिससे अधिकतम तापमान 35 डिग्री को पार कर गया है। वहीं न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री पर है।
मौसम के संक्रमण काल में सीजनल बीमारी तो बढ़ रहे हैं, लेकिन राहत की बात ये है कि राजधानी रायपुर समेत प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मरीज कम हो गए हैं। जनवरी से अब तक 650 मरीज मिले हैं और दो मरीजों की मौत हुई है। पिछले सप्ताहभर से संदिग्ध तो आ रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। अस्पतालों व क्लीनिक में भी बदलते मौसम से जुड़ी तकलीफों वाले मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार मरीज 5 से 7 दिनों में ठीक भी हो रहे हैं।
मौसम के इस बदलाव में सबसे ज्यादा सावधानी सुबह व देर शाम बरतने की जरूरत है। सुबह के समय ठंडी हवा व रात में गिरता तापमान शरीर को प्रभावित कर रहा है, जबकि दिन में तेज धूप और गर्मी से तापमान में अचानक अंतर महसूस होता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम बदलने के दौरान शरीर को अचानक गर्मी से ठंडक या ठंडक से गर्मी में जाने से बचाना जरूरी है। सुबह और रात के समय हल्के गर्म कपड़े रखें।
डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, इन दिनों पहले से सांस लेने में परेशानी व अस्थमा वाले मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। गले में इंफेक्शन के केस भी आ रहे हैं, क्योंकि रात व दिन के तापमान में काफी अंतर है। लोग खाने में सावधानी नहीं बरत रहे हैं। कोई भी चीज फ्रिज से निकालते ही नहीं खानी है।
डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, मौसम में बदलाव से ओपीडी में सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश व वायरल के 20 से 25 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। ऐेसे मरीज 5 से 7 दिनों में ठीक भी हो रहे हैं। दिन में तेज धूप व रात में ठंडक से शरीर का तापमान प्रभावित होता है और लोग बीमार पड़ रहे हैं।