रायसेन

बावड़ी को बचाने की दरकार, नगर की प्राचीन चौपड़ा बावड़ी का अस्तित्व खतरे में।

बावड़ी को बचाने की दरकार, नगर की प्राचीन चौपड़ा बावड़ी का अस्तित्व खतरे में।

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May 10, 2018
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रायसेन। गर्मियों के शुरू होते ही शहर के लोग जलसंकट का सामना करने लगते हैं। जबकि नगर के लोगों को जल सप्लाई के लिए नगर पालिका द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। नपा के खुद के लगभग ४० बोर के अलावा हलाली बांध से आ रहा पानी सप्लाई किया जा रहा है। बाबाजूद इसके जलसंकट के हालात बने हुए हैं। ऐसे में कभी पूरे नगर को पानी उपलब्ध कराने वाले प्राचीन जल स्रोतों की याद आना लाजमी है।

रायसेन में चौपड़ा पर स्थित प्राचीन बावड़ी आज भी पानी से भरी है। लेकिन इसका पानी उपयोग के काबिल नहीं है। देखरेख और संरक्षण के अभाव में बावड़ी का पानी दूषित हो गया है। साथ ही जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। बावड़ी की दीवारों, सीढिय़ों पर घास और झाड़ी उग आई हैं। जिससे उसके छतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। यह बावड़ी अभी इतनी खस्ताहाल भी नहीं कि उसका संरक्षण कर उपयोग के काबिल नहीं किया जा सके। यदि प्रयास किए जाएं तो चौपड़ा बावड़ी आज भी लोगों की प्यास बुझाने में सक्षम है। नगर के सामाजिक संगठनों के साथ नगर पालिका और प्रशासन को इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

नबाबी दौर की है बावड़ी
नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने बताया कि चौपड़ा बावड़ी नबाबी दौर में बनी थी। उस समय इससे रायसेन के लगभग आधे हिस्से के लोग पानी भरते थे। इसी बावड़ी से लोगों की प्यास बुझती थी। इसी बावड़ी के नाम से यहां मोहल्ला बसा हुआ है। लेकिन समय के साथ जिम्मेदारों ने बावड़ी की अनदेखी शुरू कर दी। जिससे धीरे-धीरे यह अनुपयोगी हो गई। साथ ही पानी दूषित होकर उपयोग के काबिल नहीं बचा। जबकि बावड़ी में आज भी पानी झिरें हैं, यदि सफाई हो जाए और दूषित पानी को बाहर कर दिया जाए तो इस बावड़ी में स्वच्छ पानी एकत्र हो सकता है।

Published on:
10 May 2018 11:31 am