
Rajgarh News : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 साल पूरे होने के मौके पर भाजपा ने बुधवार को मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिला मुख्यालय के स्टेडियम प्रांगण में 'विकसित भारत संकल्प सभा' और 'सेवा ज्योति संकल्प यात्रा' का आयोजन किया गया। आयोजन सुबह 10.15 बजे शुरू होना था, जिसे प्रधानमंत्री संबोधित करने वाले थे, लेकिन स्टेडियम प्रांगण की अधिकतर कुर्सियां खाली थीं। यानी कहने को आयोजन जिलास्तरीय था, लेकिन उसमें पार्टी के ही कार्यकर्ता नाम मात्र के थे। यानी भाजपा के इतने बड़े आयोजन में मप्र शासन के दो मंत्री समेत पांच विधायक मिलकर भी भीड़ जुटाने में नाकाम रहे। मानो कार्यक्रम खानापूर्ति हो।
कार्यक्रम में जिले की पांचों विधानसभाओं से कार्यकर्ता, हितग्राही और आमजन शामिल हुए। कार्यक्रम में राज्य मंत्री नारायणसिंह पंवार, राज्य मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक नरसिंहगढ़ मोहन शर्मा, विधायक खिलचीपुर हजारीलाल दांगी सहित भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का एलईडी स्क्रीन से सीधा प्रसारण किया गया। उपस्थित लोगों को विकसित भारत का संकल्प दिलाया गया और भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर ने सेवा संकल्प ज्योति प्रज्वलित की। कार्यक्रम के समापन पर पांचों विधानसभाओं के कार्यकर्ता सेवा संकल्प ज्योति लेकर अपनी-अपनी विधानसभा के लिए रवाना हुए। खाली कुर्सियां और कार्यक्रम की सीमित भीड़ चर्चा का विषय बने रहे।
पूरे आयोजन के दौरान पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि सबसे ज्यादा संख्या नरसिंहगढ़ और ब्यावरा की नजर आ रही थी। सारंगपुर दूर होने से कम कार्यकर्ता आए वहीं, जिला मुख्यालय होने के बावजूद राजगढ़ विस और सबसे नजदीक होने के बावजूद खिलचीपुर से काफी कम लोग आए थे। बड़े नेताओं ने हाथों में मशाल लेकर फोटो सेशन वाली रैली जरूर निकाली लेकिन सरकारी कार्यक्रमों की तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य सरकारी कर्मी नहीं होने से भीड़ न के बराबर थी।
1496 बूथ केंद्रों से 11-11 कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य था। इस हिसाब से कुल 16,456 कार्यकर्ता, पदाधिकारी और अन्य लोग जुटने थे। एक बाइक पर दो कार्यकर्ताओं के आने की व्यवस्था थी। शक्ति केंद्रों से मंडल, फिर विधानसभा स्तर पर एकत्रित होकर सभी को जिलास्तरीय कार्यक्रम में पहुंचना था। लेकिन कार्यक्रम के दौरान करीब 80 प्रतिशत कुर्सियां खाली नजर आईं। ऐसे में तय लक्ष्य के मुकाबले मौजूदगी को लेकर सवाल उठे।
प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के सदस्य और कार्यक्रम प्रभारी दिलवर यादव का कहना है कि, कार्यक्रम में 1496 बूथों से 11-11 कार्यकर्ताओं को बुलाने का लक्ष्य था। शक्ति केंद्र से मंडल और विधानसभा स्तर पर एकत्रित होकर कार्यकर्ताओं को जिलास्तर पर आना था। 11 बाइक पर दो-दो कार्यकर्ता भी पहुंचे। दो पिकअप और अतिरिक्त कुर्सियों की व्यवस्था पहले से की गई थी। कुछ कार्यकर्ता थोड़े देर से आए। फसल कटाई के कारण संख्या कुछ कम रही। शुरुआत में कम भीड़ थी, बाद में संख्या बढ़ी।
प्रधानमंत्री का लाइव संबोधन, सेवा संकल्प का आयोजन और मंच के सामने खाली पड़ी कुर्सियां… स्टेडियम में मिलीं तस्वीरें कई सवाल छोड़ गईं। जिलास्तरीय आयोजन में जब सत्तादल के दो मंत्री और पांचों विधायक मौजूद हों, तब भी अपेक्षित संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी नहीं होना क्या स्थानीय नेतृत्व के लिए चिंता का विषय नहीं है? सवाल ये भी है कि, क्या कार्यकर्ता ऐसे आयोजनों से दूरी बनाने लगे हैं? क्या स्थानीय जनप्रतिनिधि और संगठन अपने कार्यकर्ताओं से अपेक्षित संवाद नहीं कर पा रहे हैं? या फिर कार्यकर्ताओं में ही अब ऐसे आयोजनों को लेकर उत्साह कम हुआ है?
खाली कुर्सियों को केवल भीड़ का आंकड़ा मानकर नजरअंदाज करना आसान है, लेकिन राजनीतिक संगठनों में कार्यकर्ता ही सबसे बड़ी ताकत होते हैं। ऐसे में यह आयोजन भाजपा के स्थानीय नेतृत्व के सामने आत्ममंथन का सवाल जरूर छोड़ गया है। आखिर कार्यकर्ता आयोजन स्थल तक क्यों नहीं पहुंचे?