
Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर के अंतर्गत आने वाले बरेड़ी गांव में गुरुवार को हर कोई गमगीन नजर आया। कारण था एक गाय… जिसकी मृत्यु के बाद अंतिम विदाई ने यहां रहने वाले एक परिवार के साथ - साथ पुरे गांव की आंखे नम कर दीं।
आपको बता दें कि, यहां तीन दशक तक जिस आंगन में गंगा (गाय) की रंभाने की आवाज गूंजती रही, गुरुवार को उसी परिवार के लिए माहौल गमगीन था। गंगा ने अंतिम सांस ली तो परिवार ने उसे पशु नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह अंतिम विदाई दी। समीपस्थ ग्राम बरेडी में महेंद्र सिंह के परिवार ने करीब 30 साल से साथ रही अपनी गाय गंगा की मृत्यु पर पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी की।
गंगा परिवार के साथ तीन दशक तक रही। इस लंबे साथ में वो संबंधित परिवार के हर सुख - दुख की साक्षी भी रही और धीरे-धीरे परिवार के हर सदस्य से उसका ऐसा लगाव हो गया कि, उसकी पहचान सिर्फ एक गाय तक सीमित नहीं रही, बल्कि वो इस परिवार का ही सदस्य बन गई। उसकी मृत्यु की खबर से घर में शोक छा गया। वहीं दूसरी तरफ क्योंकि, गाय की उम्र तीस वर्ष से अदिक थी, इसलिए गांव की बड़ी युवा पीड़ी उससे काफी छोटी थी। इसके अलावा गांव के सभी लोग भी उसका आदर करते। ऐसे में जब गाय की मृत्यु की खबर जैसे ही फैली, गांव का हर एक इंसान दुखी हो गया।
इधर, गाय के मालिक परिवार ने हिंदू रीति रिवाज से सभी परंपराओं का पालन करते हुए अंतिम संस्कार किया। सबसे पहले परिजन ने गंगा को स्नान कराया। इसके बाद फूलों से सजाया और मेहंदी लगाकर अंतिम विदाई के लिए तैयार किया। परिवार के सदस्यों के साथ ग्रामीण भी उसकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। भावुक माहौल के बीच आतिशबाजी भी की गई और पूरे सम्मान के साथ गंगा को विदाई दी गई।
परिजनों का कहना था कि, गंगा उनके लिए सिर्फ एक गाय नहीं थी, बल्कि वो तीन दशक से परिवार के साथ रही और उसके साथ जुड़ी अनगिनत यादें अब हमेशा उनके बीच रहेंगी। अंतिम यात्रा में शामिल हर कोई भावुक था तो वहीं, परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं। गंगा की विदाई ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया।