राजगढ़

मौत के बाद भी कर्मचारी को हर महीने मिलता रहा वेतन, राजगढ़ स्वास्थ्य विभाग में अजब कारनामा

Dead Employee Salary : मृत कर्मचारी के नाम पर मौत के बाद भी होता रहा वेतन भुगतान, सीएमएचओ और लेखापाल दोषी पाए जाने के बाद निलंबित किए गए। स्वास्थ्य आयुक्त की कार्रवाई।
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Dead Employee Salary
राजगढ़ जिला चिकित्सालय की तस्वीर (फोटो सोर्स: Patrika)

Rajgarh News : मृत कर्मचारी के नाम पर उसकी मौत के बाद भी कई महीनों तक वेतन भुगतान किए जाने के मामले में मध्य प्रदेश शासन ने राजगढ़ की प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच में डॉ. शोमा पटेल के साथ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के लेखापाल दिनेश पारिक को भी दोषी पाया गया है। उन्हें भी निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि में डॉ. पटेल का मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल निर्धारित किया गया है। वहीं, पारीक को नर्मदापुरम अधीन किया गया है। मामले की जांच क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल संभाग के स्तर से कराई गई। तीन सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर 22 सितंबर 2026 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

18 जनवरी को मौत हुई, अक्टूबर तक मिलता रहा वेतन

बताया जा रहा है कि, स्वीपर सुमित्रा बाई की 18 जनवरी 2025 को मृत्यु हो गई थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ढाबला नरसिंहगढ़ से उनकी मृत्यु की सूचना 28 जनवरी 2025 को मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी नरसिंहगढ़ और जिला राजगढ़ को दी जा चुकी थी। जांच में सामने आया कि, उपस्थिति पंजी में सुमित्रा बाई की उपस्थिति 15 जनवरी 2025 तक दर्ज थी। इसके बाद 16 जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 तक की उपस्थिति पंजी में उनके नाम का उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद उनके खाते में अक्टूबर 2025 तक वेतन भुगतान होता रहा। शिकायत में वेतन की राशि 14,844 रुपए महीना बताई गई। यानी कर्मचारी की मृत्यु और विभाग को इसकी सूचना मिलने के बाद भी उसके खाते में कई महीनों तक वेतन भुगतान जारी रहा।

भुगतान वित्तीय अनियमितता माना गया

जांच दल ने इस भुगतान को वित्तीय अनियमितता माना है। शासन द्वारा रिपोर्ट के परीक्षण में सीएमएचओ डॉ. पटेल और लेखापाल दिनेश पारिक को मामले में दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने माना कि डॉ. शोमा पटेल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्वेच्छाचारिता बरती और शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाई। इसके आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हालांकि इस पूरे मामले में तत्कालीन लेखापाल (वर्तमान सेवानिवृत्त) रामगोपाल नारेड़ा को भी जांच में दोषी पाया गया है। उनकी सेवानिवृत्ति हो गई है, इसलिए अब विभागीय स्तर पर कार्रवाआई सुनिश्चित की जाएगी।

आयुक्त के आदेश में महिला की मौत का तारीख अलग-अलग

इस सबके बीच विशेष बात यह रही कि संचालक, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मप्र द्वारा सीएमएचओ व लेखापाल के निलंबन संबंधित जो निलंबन संबंधित दोनों के अलग-अलग आदेश जारी किए हैं उसमें स्वीपर सुमित्राबाई की मृत्यु अलग-अलग दिनांक में बताई है। सीएमएचओ के निलंबन आदेश में सुमित्राबाई की मृत्यु 18 जनवरी 2025 को होना बताई है, जबकि लेखापाल के निलंबन आदेश में सृमित्रा की मृत्यु 20 जनवरी 2025 को होना बताई है।

रिश्वत लेते पकड़ी गईं थीं सीएमएचओ, कोर्ट के स्टे पर काबिज थीं

जानकारी के अनुसार राजगढ़ सीएमएचओ डॉ. पटेल काफी चर्चा में रहीं हैं। वे 17 अप्रेल को राजगढ़ के उनके खुद के निवास पर 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार हुई थीं। भोपाल लोकायुक्त ने उन्हें ट्रेस किया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर पर उनका ट्रांसफर 27 अप्रेल को शाजापुर कर दिया गया था। इसी बीच उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से उन्हें मई के पहले सप्ताह में स्टे मिला था, इसके बाद से वे अपने पद पर काबिज थीं।

Updated on:
01 Oct 2026 07:30 pm
Published on:
01 Oct 2026 07:30 pm