
Rajgarh news: हॉयर एजुकेशन के लिए घर से बाहर हॉस्टलों में रह रहे बच्चों को अच्छा खाना तक नसीब नहीं हो पा रहा है। शासकीय महाविद्यालय बालक पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की स्थिति ऐसी है कि विद्यार्थियों की थाली तक सुरक्षित नहीं है। खाने की दाल में कीड़े निकल रहे हैं, वहीं नाश्ते में अधपके पोहे परोसे जा रहे हैं। भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था से परेशान विद्यार्थियों को कई बार भूखे ही रहना पड़ रहा है। जिस छात्रावास में 50 से अधिक विद्यार्थी रहते हैं, वहां रसोई से लेकर कमरों और पेयजल स्थल तक अव्यवस्थाओं का आलम है।
50 से अधिक विद्यार्थियों के रहने वाले इस छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता से लेकर कमरों की स्थिति और अधीक्षक की उपलब्धता तक कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह है कि अनुसूचित जाति विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों की जांच कर विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
छात्रों के मुताबिक छात्रावास में भोजन तैयार करने और परोसने की व्यवस्था में स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा जा रहा। दाल में कीड़े निकले और अधपके पोहे ही परोसे गए। रसोई की हालत भी साफ-सफाई के लिहाज से संतोषजनक नहीं है। पेयजल के नल के आसपास भी गंदगी जमा रहती है। सफाईकर्मी सप्ताह में केवल एक दिन आता है, ऐसे में नियमित सफाई नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
छात्रावास के कमरों की हालत भी विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ा रही है। कमरों में सीलन जमी हुई है और खिड़कियों के कांच तक नहीं हैं। विद्यार्थियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध बेड टूटे हुए हैं। कुर्सियां और टेबल भी क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में पढ़ाई, आराम और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जरूरी सुविधाएं भी व्यवस्थित नहीं हैं।
छात्रों की शिकायतों के मुताबिक छात्रावास अधीक्षक परिसर में निवास नहीं करते। उनके लिए निर्धारित कक्ष में चौकीदार रहता है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं लेकर अधीक्षक से बात करते हैं तो उन्हें समाधान का भरोसा देने के बजाय कथित तौर पर यह जवाब मिलता है कि 'जाओ, जो करना है करो, चाहो तो 181 पर शिकायत कर दो। हम कुछ नहीं कर सकते।' इससे विद्यार्थियों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि जब छात्रावास में भोजन, सफाई, पेयजल और रहने की सुविधाओं की जिम्मेदारी है तो शिकायतों के समाधान की जवाबदेही कौन लेगा ?