
(राजगढ़ से राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट)
Rajgarh News: राजगढ़ जिले के भोजपुर क्षेत्र के एक गांव में 15 साल की नाबालिग लड़की की जिंदगी से जुड़ा मामला सामने आया है। महज 12 साल की उम्र में उसका विवाह पड़ोसी गांव में कर दिया गया था। तीन साल बाद पति-पक्ष से विवाद हुआ तो मामला परिवारों से निकलकर पंचायत तक पहुंच गया। बुधवार को करीब 60 लोगों की मौजूदगी में हुई झगड़ा पंचायत (Rajgarh Jhagda Pratha) में कथित तौर पर लड़की के पिता पर 13 लाख रुपए नकद और करीब डेढ़ किलो चांदी, यानी कुल करीब 17 लाख रुपए और साढ़े तीन लाख अलग से फसल के नुकसान के देने का फैसला सुनाया गया। यानी इस फरमान के अनुसार उसे पूरी रकम अदा करना है। झगडा कुप्रथा को लेकर भोजपुर थाने में इसी मामले को लेकर 2 बार एफआइआर दर्ज हो चुकी है। लेकिन कार्रवाई के बाद भी आरोपी मान नहीं रहे है, फसल में नुकसान करने और धमकाने से पीछे नहीं हट रहे।
बताया जा रहा कि दोनों पक्षों में झगड़े को लेकर हुए विवाद के दौरान लड़की के पिता और गांव के अन्य लोगों की फसल भी काट दी गई और आगजनी से नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पंचायत के फैसले में इस नुकसान की राशि सहित अन्य मदों को जोड़कर पिता पर करीब 17 लाख रुपए का आर्थिक बोझ पड़ने की बात सामने आई है। पिता के अनुसार उसे करीब साढ़े तीन लाख रुपए का फसल खराब होने का नुकसान भी उठाना पड़ेगा। मामले में सबसे अहम सवाल उस 15 साल की बच्ची का है। तीन साल पहले जिस उम्र में उसे विवाह के बंधन में बांध दिया गया, आज उसी उम्र में उसकी जिंदगी का फैसला पंचायत और पैसों के बीच होता नजर आ रहा है। पढ़ाई, सुरक्षा, भविष्य और उसकी इच्छा पर सवाल खड़े हो रहे है।
आर्थिक दबाव से परेशान पिता की बेबसी भी सामने आई है। उसका कहना है- "पैसे कहां से लाऊं? सबका दबाव है… क्या करूं?" यह सवाल सिर्फ एक परिवार की आर्थिक परेशानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक दबाव की तस्वीर है जिसमें बेटी के भविष्य से ज्यादा रकम और समझौते की चर्चा होने लगती है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यह भी है कि एक नाबालिग बच्ची की जिंदगी को किसी पंचायत के आर्थिक फैसले से नहीं तौला जा सकता। उसे रकम या समझौते से ज्यादा सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और अपने भविष्य का अधिकार चाहिए। अधियनियम-2006 के तहत मामले में नाबालिग है, उसका विवाह हुआ, उसके साथ गलत भी हुआ है। ऐसी स्थिति में पूरे प्रकरण में जेजे और पॉक्सो एक्ट सहित बाल विवाह प्रतिषेध कायमी का नियम है।
जिले में झगड़ा जैसी कुप्रथाओं पर रोक के साथ बाल सगाई और बाल विवाह को भी पूरी तरह रोकना होगा। इसको लेकर सामूहिक प्रयासों से ही हम कुरीतियों से मुक्त, सुरक्षित और बेहतर राजगढ़ बना सकते हैं। जहां जिले के हर बच्चे को शिक्षा, सम्मान और अपने सपनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले। -मनीष दांगी, समंवयक, अहिंसा वेलफेयर सोसायटी