राजगढ़

सुठालिया में किसानों की हुंकार को मिला मेधा पाटकर का साथ, बोलीं- ये अस्तित्व और पुनर्वास की लड़ाई है

Suthaliya Irrigation Project : किसानों के धरने के बीच पहुंचीं मेधा पाटकर ने कहा- विकास के नाम पर उजाड़ना न्याय नहीं, समय रहते शासन किसानों के साथ न्याय करे। सुठालिया में डूब प्रभावित किसानों का समर्थन किया।
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Suthaliya Irrigation Project
आंदोलन में शामिल हुई मेधा पाटकर (फोटो सोर्स: Patrika)

Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित सुठालिया सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों के अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल में मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी शामिल हुईं। बस स्टैंड परिसर में चल रहे आंदोलन में पहुंचकर उन्होंने किसानों की मांगों का समर्थन किया और शासन से समय रहते उचित मुआवजा व पुनर्वास की मांग पूरी करने की बात कही। उन्होंने कहा कि, विकास के नाम पर किसानों को उजाड़ना न्याय नहीं है। ये लड़ाई केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व और पुनर्वास की भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बता दें कि डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसान मंगलवार 15 सितंबर से नौ सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे हैं। धरना स्थल पर किसानों ने बैनर लगाकर 'हमारा हक, हमारी मांग, न्याय दो' का नारा दिया है। किसानों का कहना है कि, परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों को उनकी जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों का उचित मुआवजा तथा व्यवस्थित पुनर्वास मिलना चाहिए।

किसानों ने चार गुना मुआवजे की मांग

किसानों की प्रमुख मांग सभी प्रभावित किसानों को बिना भेदभाव चार गुना मुआवजा देने की है। उनका कहना है कि वर्तमान में प्रति बीघा करीब 2 लाख 40 हजार रुपए के आसपास मुआवजा दिया गया है, जो बाजार दर की तुलना में कम है। किसानों के अनुसार इस राशि से नई जमीन खरीदना मुश्किल है। उन्होंने पार्वती नदी के आसपास की शासकीय बंजर भूमि विस्थापित परिवारों को आवंटित करने की मांग भी रखी है।

18 वर्ष पूर्ण करने वालों को मिले विस्थापन का लाभ

किसानों ने मांग की है कि डूब क्षेत्र के ऐसे सदस्य, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, उन्हें बालिग मानते हुए निकासी दिनांक के आधार पर विस्थापन का लाभ दिया जाए। खेतों में स्थित मकान, कुआं, ट्यूबवेल, पेड़-पौधे और सिंचाई पाइपलाइन का अलग से मुआवजा देने की मांग भी की गई है। वहीं, किसानों ने टोडी, निवारा, गुजरखेड़ी और कांकरखेड़ी में सर्वे के बाद काटी गई मकानों की मुआवजा राशि बहाल करने की मांग की है।

90% से अधिक जमीन डूबने पर पुनर्वास की मांग

किसानों ने कहा कि जिन परिवारों की 90 से 100 प्रतिशत कृषि भूमि डूब क्षेत्र में आ रही है, उन्हें पुनर्वास का लाभ दिया जाना चाहिए। पुनर्वास स्थलों के नाम डूब प्रभावित गांवों के नाम पर रखने की मांग भी की गई है, ताकि गांवों की सांस्कृतिक पहचान बनी रहे। किसानों ने काकलिया गुर्जर, सेमलापार, राजपूतखेड़ा, सकेनपुर सहित सभी प्रभावित गांवों को पूर्णतः डूब क्षेत्र में शामिल करने की मांग की। किसानों के अनुसार काकलिया गुर्जर में 171 में से केवल 69 मकानों को डूब क्षेत्र में लिया गया है।

पुनर्वास आवासों की गुणवत्ता पर भी सवाल

आंदोलन कर रहे किसानों ने पुनर्वास के तहत बनाए जा रहे आवासों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि सही आकलन के बिना निर्माण किया जा रहा है और अधिकांश प्रभावित परिवारों को अब तक आवासीय दायरे में शामिल नहीं किया गया है। पार्वती नदी पर डैम का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब नहरों का कार्य शुरू होने वाला है। ऐसे में विस्थापन और मुआवजे से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होने से प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी को लेकर किसान अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

Updated on:
15 Sept 2026 08:05 pm
Published on:
15 Sept 2026 08:05 pm