
राजगढ़. अब इसे अजब एमपी का गजब मामला कहें या फिर सिस्टम की गड़बड़ी क्योंकि जो इंसान जिंदा है उसे भला क्यों और कैसे कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। मामला राजगढ़ जिले का है जहां एक बुजुर्ग दंपत्ति खुद के जिंदा होने का सबूत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। बुजुर्ग का कहना है कि सरकारी कागजों पर उन्हें मृत बताकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई है ऐसे में अब उनका गुजारा कैसे होगा ?
15 नवंबर को मर चुके हैं बुजुर्ग दंपति !
राजगढ़ जिले के बैलास गांव रहने वाले बुजुर्ग बद्रीलाल सोंधिया और उनकी पत्नी सौरम बाई को सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी। लेकिन बीते 4 महीनों से जब पेंशन नहीं मिली तो उन्होंने ब्यावरा जनपद पंचायत कार्यालय में जाकर पता किया। जनपद पंचायत कार्यालय से पता चला कि बुजुर्ग बद्रीलाल सोंधिया और उनकी पत्नी सौरम बाई तो सरकारी कागजों में 15 नवंबर को ही मर चुके हैं। इसलिए उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती। कागजों में खुद के मृत होने की जानकारी मिलने के बाद से अब तक बुजुर्ग बद्रीलाल खुद को जिंदा साबित करने और फिर से पेंशन शुरु कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
एसडीएम से कहा- 'साहब मैं जिंदा हूं...मेरी पेंशन चालू करा दीजिए'
पीड़ित वृद्ध बद्रीलाल ने अब ब्यावरा एसडीएम निधि सिंह से न्याय की गुहार लगाई है। बुजुर्ग ने एसडीएम से कहा कि साहब मैं और मेरी पत्नी जिंदा है, हमें पेंशन दिलवाइये । एसडीएम निधि सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित बुजुर्ग को जल्द पेंशन शुरु कराने का आश्वासन दिया है साथ ही लापरवाहों पर कार्रवाई की बात भी कही है।
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