
Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग के जिस पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा था, वहां सब एक ही दिन में लगभग सभी व्यवस्थाएं पटरी पर आ गई हैं। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए प्रशासन की टीम ने न सिर्फ जांच की, बल्कि वहां पर गद्दे, पलंग और जरूरी सामान भिजवा दिए। साथ ही, जो खिड़कियां टूटी हुई थीं उनकी मरम्मत भी करवानी शुरु कर दी है।
दरअसल, यहां छात्रों को रोजाना नियमित तौर पर मिलने वाले खाने में कीड़े निकलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। साथ ही, सफाई को लेकर भी छात्र लगातार शिकायतें कर रहे थे। खाने में कीड़े, अधपका भोजन समय कई सुविधाओं का अभाव था, जिससे छात्रों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
ऐसे में पत्रिका में मंगलवार के अंक में के 'दाल में कीड़े, नाश्ते में अधपके पोहे और टूटे बेड पर कट रही रात' शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया था। इसके बाद आनन-फानन में कलेक्टर ने दल बनाया और हॉस्टल की जांच कराई। जहां प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष बिगड़े हुए ढर्रे की तस्वीर सामने आ गई। जिला मुख्यालय के छात्रावास की ये स्थिति है, जहां रात-दिन अफसर आते-जाते रहते हैं। पत्रिका छात्रों की आवाज बना तो उनकी व्यवस्थाओं में सुधार हुआ।
इस खामी को जांचने के लिए कलेक्टर ने तहसीलदार और आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक संजय साहू को भी टीम में रखा है, जिन्हें बजट की दिक्कत थी और जिनके अनुसार छात्र मनमानी कर रहे थे। हालांकि उन्हें भी खामियां नजर आईं। उन्होंने साथ में ही निरीक्षण किया, छात्रावास के एक-एक कमरे में जाकर व्यवस्थाएं भी देखीं। कलेक्टर ने अधीक्षक को परिसर में ही रुकने के निर्देश दिए। अधीक्षक शैलेंद्र समाधिया सहित अन्य की स्थायी ड्यूटी छात्रावास में लगा दी गई है। पहले उन्हें परिसर में ही बने आवास में रुकने में दिक्कत थी। अब कलेक्टर के निर्देश पर उन्हें वहीं रुकना होगा।
पत्रिका की खबर इतनी असरकार रही कि जिस किचिन में घटिया खाना बनाया जा रहा था वहां एक ही दिन में क्वालिटी वाला खाना बनने लगा। साथ ही गद्दे, पलंग सब पहुंच गए। सफाई भी करवाई गई। टूटी हुई खिड़कियों की मरम्मत होने लगी और जिस लाइब्रेरी में सामान नहीं मिल रहे थे वहां दो एसी पहुंच गई। पूरी लाइब्रेरी को अब ई-लाइब्रेरी में कनवर्ट किया जाएगा। यानी सब कुछ हाईटैका होगा। छात्रों ने अंदाजा नहीं लगाया था कि एक ही दिन में अधिकारी जागृत होकर उनके लिए इतना कुछ कर देंगे।
अभी तक बच्चों को मनचाहा खाना आदिम जाति कल्याण विभाग की ओर से परोसा जा रहा था। जिसे लेकर जिला अधिकारी, अधीक्षक सभी की मनमानियां चल रही थीं। कोई सुनने को तैयार नहीं था। पत्रिका ने छात्रों की आवाज बनकर सिस्टम को जगाया। वहीं, लंबे समय से चली आ रही छात्रों की समस्याओं का निराकरण भी हो गया। इधर, छात्रों ने कहा कि थैंक्यू पत्रिका। आपके कारण यह हो पाया, हमें खाना भी एक ही दिन में क्वालिटी वाला मिलने लग गया और व्यवस्थाएं भी हो गई हैं।
राजगढ़ तहसीलदार वीनित गोयल ने कहा कि, 'कलेक्टर सर ने दल बनाया था, जिसके तहत मैं और आदिम जाति कल्याण विभाग के संयोजक गए थे। वहां हमें छात्रों ने खाने संबंधी शिकायत की है, गुणवत्तायुक्त खाना उन्हें नहीं मिल रहा। फर्नीचर सहित अन्य समस्याएं भी उनकी हैं, हमने पंचनामा बनाया है। साथ ही प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर सर को भेज दिया है। उसमें आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर निर्धारित की जाएगी।'