
CEO Transfer News: छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में पंचायत विभाग और सरपंचों के बीच चल रहे विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी, अनावश्यक देरी और प्रशासनिक अनदेखी के आरोपों के बीच मोहला जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) प्रांजल प्रजापति का तबादला बस्तर कर दिया गया है। हालांकि सरकार ने तबादले को विवाद से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे सरपंचों के आंदोलन के बाद हुई पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले एक सप्ताह से मोहला, मानपुर और अंबागढ़ चौकी विकासखंड के 185 सरपंच जिला पंचायत प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। सरपंचों का आरोप है कि निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशन मांगा जा रहा है, भुगतान में अनावश्यक देरी की जा रही है और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की अनदेखी हो रही है। इन आरोपों के आधार पर सरपंच संघ ने जिला पंचायत CEO के तबादले की मांग करते हुए सामूहिक इस्तीफे तक की चेतावनी दी थी।
जनपद CEO के तबादले वाले दिन ही जिला सरपंच संघ का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रायपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधियों ने पंचायत विभाग से जुड़ी शिकायतों और कथित अनियमितताओं की जानकारी भी शासन के समक्ष रखी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जनपद CEO का तबादला इन घटनाक्रमों से जुड़ा है या नहीं, लेकिन दोनों घटनाओं के एक साथ सामने आने से इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। कलेक्टर ने दो अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर सहित 12 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को तीन अलग-अलग टीमों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक टीम मोहला, मानपुर और अंबागढ़ चौकी जनपद पंचायत में जाकर सरपंच संघ की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत तथ्यों की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरपंच संघ का आरोप है कि पंचायतों में कराए गए निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी की जा रही है। साथ ही भुगतान में देरी और प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नहीं मिलने की शिकायत भी की गई है। इसी मुद्दे को लेकर 185 सरपंचों ने जिला पंचायत CEO के तबादले की मांग उठाई थी और मांग पूरी नहीं होने पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी थी।
जनपद पंचायत CEO के तबादले के बावजूद सरपंच संघ अपनी मूल मांग पर कायम है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिला पंचायत CEO के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और आवश्यक कार्रवाई की जाए। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और शासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।