
130th Constitutional Amendment Bill: JPC रिपोर्ट पर सबकी नजर(photo-patrika)
130th Constitutional Amendment Bill: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को न्यायिक हिरासत की स्थिति में पद से हटाने से जुड़े प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। यदि समिति की सिफारिशों के बाद यह विधेयक संसद से पारित होकर कानून बनता है, तो इसका असर छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी समान रूप से लागू होगा। हालांकि फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और अभी कानून नहीं बना है।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार यदि प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री को पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले गंभीर अपराध के मामले में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ता है, तो उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। प्रस्ताव के मुताबिक 31वें दिन राष्ट्रपति या राज्यपाल संबंधित पदाधिकारी को पदमुक्त कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार संयुक्त संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट में इस प्रावधान को बरकरार रखने की सिफारिश कर सकती है। हालांकि इसके दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जोड़ने की भी संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट के बाद विधेयक को संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
यदि यह विधेयक पारित होता है तो इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद पर समान रूप से लागू होगा। ऐसे में किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले में लंबी न्यायिक हिरासत की स्थिति बनने पर नए संवैधानिक प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह केवल प्रस्तावित विधेयक है और अभी कानून नहीं बना है।
विधेयक को लेकर विपक्ष ने शुरू से ही आपत्ति जताई है। विपक्षी दलों का कहना है कि किसी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले केवल न्यायिक हिरासत के आधार पर पद से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। वहीं सरकार का तर्क है कि लंबे समय तक हिरासत में रहने वाला व्यक्ति प्रभावी ढंग से संवैधानिक जिम्मेदारियां नहीं निभा सकता, इसलिए प्रशासनिक और नैतिक दृष्टि से यह व्यवस्था आवश्यक है।
संभावना है कि JPC की रिपोर्ट आने के बाद संसद के आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक पर चर्चा होगी। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित संशोधन अपने मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ेगा या समिति की सिफारिशों के आधार पर इसमें बदलाव किए जाएंगे।
Published on:
02 Jul 2026 01:34 pm
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