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सरकारी जमीन को बताया आबादी भूमि! छत्तीसगढ़ में PM आवास योजना के 246 आवासों में हुई हेराफेरी, जांच शुरू

PM Awas Yojana scam: सक्ती जिले के बाराद्वार नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर विवाद गहरा गया है। सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में कथित बदलाव कर आवास स्वीकृत कराने के आरोप लगे हैं। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

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PM Awas Yojana

PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ में PM आवास योजना के 246 आवासों में हुई हेराफेरी(photo-patrika)

PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के बाराद्वार नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि कुछ आवासों की स्वीकृति के लिए सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि योजना के तहत स्वीकृत कई आवासों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में नगर पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधियों और तत्कालीन पटवारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

PMAY Fraud Allegation: आवास योजना पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार नगर पंचायत बाराद्वार में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 288 आवासों के लिए दस्तावेज तैयार किए गए हैं। आरोप है कि इनमें से करीब 246 आवास आबादी और घास मद की भूमि पर प्रस्तावित हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि घास मद की भूमि का उपयोग आवास निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता, लेकिन रिकॉर्ड में बदलाव कर उसे आबादी भूमि दर्शाया गया।

246 आवासों की स्वीकृति बनी विवाद की वजह

शिकायत में दावा किया गया है कि राजस्व अभिलेखों में कथित कूट रचना कर सरकारी भूमि को आबादी भूमि के रूप में दर्ज किया गया और उसी आधार पर आवास स्वीकृति के लिए दस्तावेज शासन को भेजे गए। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं।

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने अधिकारियों से मामले की शिकायत की है। उनका आरोप है कि भूमि रिकॉर्ड में बदलाव कर नियमों के विपरीत आवास स्वीकृत कराने की कोशिश की गई। शिकायत के बाद गठित जांच टीम दस्तावेजों और जमीन से जुड़े अभिलेखों की जांच कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी से गरमाया मामला

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे ने कहा कि जिन स्थानों पर आवास बनाए गए हैं, वहां कई परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान आबादी भूमि की खरीदी-बिक्री के मामलों की भी जांच होनी चाहिए। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों ने उठाए कई सवाल

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि मामले की शिकायत नहीं होती तो क्या कथित रूप से तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर आवासों की स्वीकृति मिल जाती। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

नगर पंचायत बाराद्वार के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह राजस्व विभाग से जुड़ा मामला है और जिला स्तर पर गठित टीम इसकी जांच कर रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच पूरी होने के बाद होगा फैसला

प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर शिकायतकर्ता बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगा रहे हैं, वहीं अधिकारी जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कह रहे हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।