Naxal News: वर्षों तक जंगलों में भटकते रहे और नक्सल गतिविधियों में शामिल रहे 15 दुर्दांत नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर अब सामान्य जीवन अपनाने का फैसला लिया है।
Naxal News: वनांचल क्षेत्र में कभी दहशतगर्दी का पर्याय रहे नक्सली अब आम जनजीवन में लौटने की राह पर हैं। राजनांदगांव जिले में पिछले तीन महीनों में 15 दुर्दांत नक्सलियों ने शासन की पुनर्वास नीति पर भरोसा जताते हुए आत्मसमर्पण किया है। इनमें से कई लोग वर्षों तक जंगल और बीहड़ में रहकर नक्सलवाद की गतिविधियों में शामिल रहे थे। अब ये सभी मुख्यधारा में शामिल होकर सामान्य जीवन व्यतीत करने की तैयारी में जुट गए हैं। बकरकट्टा थाना क्षेत्र में बस्तर सहित दक्षिण छत्तीसगढ़ के इन 15 नक्सलियों में एक दंपती समेत कुल 8 महिलाएं और 7 पुरुष शामिल हैं।
जिला पुलिस प्रशासन ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। सभी 15 नक्सलियों के मतदाता परिचय पत्र (वोटर कार्ड) तैयार करा दिए गए हैं। ताकि वे भी प्रदेश में होने वाले चुनावों में सामान्य नागरिकों की तरह अपना मतदान कर सकें।
मतदाता परिचय पत्र बनाने के बाद अब आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इनमें से 9 नक्सलियों (6 महिलाएं और 3 पुरुष) का आधार कार्ड बनाने की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। शेष लोगों के मामले में कुछ तकनीकी समस्या अंगूठे के निशान संबंधी आने के कारण आधार कार्ड अभी तैयार नहीं हो पाया है, लेकिन उनकी प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर ली जाएगी।
आत्मसमर्पित नक्सलियों को बिना किसी पहचान के जंगलों में बिताए जीवन के बाद अब आधार कार्ड जैसी मजबूत नागरिक पहचान मिलने जा रही है, जो उन्हें सरकारी योजनाओं और सामान्य जीवन से जोड़ेगी। इससे बदलाव आएगा।
शासन की पुनर्वास नीति के तहत इन सभी 15 आत्मसमर्पित नक्सलियों को पूरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड बनने के बाद उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
पुलिस प्रशासन की योजना है कि इन नक्सलियों को कृषि, स्वास्थ्य, राजस्व, खाद्य सुरक्षा और अन्य विभागों की योजनाओं से सीधे लाभान्वित किया जाएगा। साथ ही, उनके परिवारों को भी मुख्यधारा में लाकर स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जाएगी।
बताया गया है कि पहचान संबंधी सभी कार्यवाही पूरी होने के बाद इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनके गृह जिले में भेजा जाएगा, जहां स्थानीय प्रशासन उनके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था करेगा। इसमें रोजगार की व्यवस्था, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों की शिक्षा जैसी जरूरी चीजें शामिल होंगी।
लक्ष्य शर्मा, एसपी केसीजी के मुताबिक, मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड बनाने के बाद शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें हर संभव सहायता दी जाएगी ताकि वे और उनका परिवार सम्मानजनक जीवन जी सकें।