Government Portal Negligence: कागजों में भले ही सरकार डिजिटल क्रांति की मिसाल पेश कर रही हो, लेकिन हकीकत में सरकारी पोर्टल की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालात ऐसे हैं कि ये पोर्टल अब सुविधा से ज्यादा ‘भ्रम’ का केंद्र बनते जा रहे हैं।
Government Portal Negligence: कागजों में भले ही सरकार डिजिटल क्रांति की मिसाल पेश कर रही हो, लेकिन हकीकत में सरकारी पोर्टल की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालात ऐसे हैं कि ये पोर्टल अब सुविधा से ज्यादा ‘भ्रम’ का केंद्र बनते जा रहे हैं। राजसमंद जिले में सरकारी वेबसाइट्स पर नजर डालें तो कई जगहों पर जानकारी महीनों से अपडेट नहीं हुई है।
आमजन जब किसी अधिकारी का संपर्क नंबर ढूंढने पोर्टल पर पहुंचता है, तो उसे ऐसे नाम और नंबर मिलते हैं जो अब उस पद पर हैं ही नहीं। यानी, सिस्टम कुछ और कहता है और जमीनी सच्चाई कुछ और ही होती है। दिलचस्प बात यह है कि कई अधिकारी बदल चुके हैं, लेकिन पोर्टल पर अब भी पुराने नाम ही जमे हुए हैं जैसे समय यहां थम सा गया हो। ऐसे में आमजन को जरूरी जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, और सरकारी ‘डिजिटल सुविधा’ उनके लिए सिरदर्द बनती जा रही है।
यह समस्या सिर्फ राजसमंद तक सीमित हो, ऐसा मानना भी मुश्किल है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की लापरवाही होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके, पोर्टल की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी इस ओर बेपरवाह नजर आ रहे हैं। डिजिटल युग में जब हर चीज एक क्लिक पर उपलब्ध होने का दावा किया जाता है, तब इस तरह की अनदेखी न सिर्फ सरकारी कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आमजन के भरोसे को भी कमजोर करती है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी ‘ऑनलाइन’ दावों को ‘ग्राउंड’ पर भी उतारें, ताकि पोर्टल सच में सुविधा का माध्यम बन सके, न कि परेशानी का कारण।
राजसमंद जिले में पुलिस अधीक्षक पद पर पहले मनीष त्रिपाठी कार्यरत रहे, जिनका तबादला हो चुका है। उनके बाद ममता गुप्ता ने पदभार संभाला और वर्तमान में हेमंत कलाल जिला पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। इसके बावजूद राज्य पोर्टल पर अब भी पुराने नाम ही दर्ज हैं, जो सिस्टम की धीमी रफ्तार को उजागर करता है। इसी तरह भीम उपखंड में एसडीएम दूदराम का तबादला हुए काफी समय बीत चुका है और वर्तमान में विकास शर्मा इस पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लेकिन पोर्टल पर अब भी पूर्व एसडीएम का नाम जस का तस है। देवगढ़ का हाल भी कुछ अलग नहीं है। यहां वर्तमान में मोहकमसिंह सिनसिनवार उपखंड अधिकारी हैं, लेकिन पोर्टल पर अर्चना चौधरी का नाम ही दिखाई दे रहा है।
सरकारी पोर्टलों की सुस्ती का एक और उदाहरण कुंभलगढ़ में सामने आया है, जहां प्रशासनिक बदलाव के बावजूद डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए हैं। इससे आमजन को गलत जानकारी मिल रही है और सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुंभलगढ़ में एसडीएम का पद कुछ समय के लिए रिक्त था। इस दौरान आमेट एसडीएम गोविंदसिंह को यहां का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। बाद में शासन ने यहां स्थायी रूप से साक्षी पुरी को नियुक्त कर दिया। हालांकि, वास्तविकता बदल चुकी है, लेकिन राज्य पोर्टल अब भी पुरानी स्थिति ही दिखा रहा है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के स्टेट पोर्टल पर फिलहाल केवल दो जिलों के प्रभारी मंत्रियों की जानकारी ही दर्ज है। इनमें दौसा जिले के लिए मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ तथा झालावाड़ जिले के लिए पंचायत राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी का नाम उल्लेखित है। इसके अलावा अन्य जिलों के प्रभारी मंत्रियों के नाम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं और न ही इस संबंध में कोई अपडेट किया गया है। ऐसे में पोर्टल की पारदर्शिता और उद्देश्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजसमंद जिले में प्रभारी सचिव के पद पर समय-समय पर बदलाव हो चुके हैं। वर्तमान में इस जिम्मेदारी का निर्वहन कन्हैयालाल स्वामी कर रहे हैं, जिन्हें हाल ही में जिले का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। इसके बावजूद राज्य सरकार के पोर्टल पर अब भी अपर्णा अरोड़ा का नाम ही दर्ज है।