राजसमंद

कुम्भलगढ़ दुर्ग: 36 किमी लंबी दीवार वाला किला, जहां जन्मे महाराणा प्रताप

Kumbhalgarh Fort Rajasthan News: राजस्थान का कुम्भलगढ़ दुर्ग अपनी 36 किमी लंबी दीवार और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जानिए इतिहास, खासियत, कैसे पहुंचें और घूमने का सही समय। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Apr 01, 2026
फोटो- यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल कुम्भलगढ़ दुर्ग

Kumbhalgarh Fort Rajasthan News: राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित कुम्भलगढ़ दुर्ग देश के सबसे भव्य और मजबूत किलों में से एक है। इस दुर्ग का निर्माण मेवाड़ के महान शासक महाराणा कुम्भा ने 13 मई 1459 को करवाया था। यह किला अरावली की पहाड़ियों में करीब 3568 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है, जिससे इसे प्राकृतिक सुरक्षा मिलती थी।

सबसे खास बात यह है कि इसी किले में 1540 में मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। यही वजह है कि यह स्थान इतिहास प्रेमियों और देशभक्तों के लिए खास महत्व रखता है।

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यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल

कुम्भलगढ़ दुर्ग को साल 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह राजस्थान के “हिल फोर्ट्स” समूह का हिस्सा है। इसे मेवाड़ की “आंख” कहा जाता है, क्योंकि संकट के समय राजपरिवार यहां आकर सुरक्षित रहता था। यह किला न केवल सुरक्षा के लिहाज से मजबूत था, बल्कि इसकी बनावट इतनी समझदारी से की गई थी कि यहां पानी, खेती और रहने की पूरी व्यवस्था मौजूद थी।

क्यों है खास?

महाराणा प्रताप की जन्मस्थली कुम्भलगढ़ दुर्ग मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। जब-जब मेवाड़ पर संकट आया, तब राजपरिवार ने इसी दुर्ग में शरण ली। महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक यह किला सुरक्षा का मजबूत केंद्र बना रहा। इसी दुर्ग में कुंवर पृथ्वीराज और राणा सांगा का बचपन बीता था। यहां कुंवर पृथ्वीराज की छतरी भी देखने को मिलती है। वहीं, महाराणा उदय सिंह को पन्ना धाय ने इसी किले में सुरक्षित रखकर उनका पालन-पोषण किया था। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने भी कुछ समय तक इसी दुर्ग में निवास किया।

एक दुखद घटना भी यहां हुई

कुम्भलगढ़ दुर्ग अपने मजबूत निर्माण के कारण लगभग अजेय रहा। इसके निर्माण के बाद कई बार इस पर आक्रमण हुए, लेकिन एक बार को छोड़कर यह किला कभी जीता नहीं जा सका। हालांकि, इस दुर्ग से जुड़ी कुछ दुखद घटनाएं भी इतिहास में दर्ज हैं। जिस वीर महाराणा कुम्भा को कोई शत्रु पराजित नहीं कर सका, उनकी मृत्यु इसी दुर्ग में उनके पुत्र ऊदा सिंह के हाथों हुई। यह घटना इस ऐतिहासिक किले के इतिहास का एक दुखद अध्याय मानी जाती है।

36 किलोमीटर लंबी दीवार, भारत की ‘ग्रेट वॉल’

कुम्भलगढ़ दुर्ग की सबसे बड़ी पहचान इसकी विशाल दीवार है। यह दीवार करीब 36 किलोमीटर लंबी और लगभग 21 फीट चौड़ी है। इतनी चौड़ी कि इस पर कई घोड़े एक साथ दौड़ सकते हैं। दुनिया में चीन की दीवार के बाद इसे दूसरी सबसे लंबी दीवार माना जाता है। इस दीवार और मजबूत किलेबंदी के कारण इस किले को जीतना बहुत कठिन था।

किले के अंदर क्या-क्या है खास?

कुम्भलगढ़ दुर्ग के अंदर कई ऐतिहासिक और सुंदर स्थान देखने को मिलते हैं

बादल महल:किले का सबसे ऊंचा और खूबसूरत महल।
कुम्भा महल: शाही निवास।
कटारगढ़: किले के अंदर बना मजबूत गढ़।
300 से ज्यादा मंदिर: जिनमें जैन और हिन्दू मंदिर शामिल हैं।

किले के अंदर जलाशय, खेत और आवासीय भवन इस तरह बनाए गए थे कि यह पूरी तरह आत्मनिर्भर दुर्ग था।

कैसे पहुंचें कुम्भलगढ़ दुर्ग?

सड़क मार्ग: उदयपुर से लगभग 85 किलोमीटर दूर, टैक्सी या बस से आसानी से पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग: उदयपुर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है।
हवाई मार्ग: महाराणा प्रताप एयरपोर्ट (उदयपुर) नजदीकी एयरपोर्ट है।

घूमने का सही समय और टाइमिंग

सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च। (सर्दियों में मौसम ठंडा और सुहावना रहता है।)
समय: सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक।
खास आकर्षण: शाम का लाइट एंड साउंड शो, जिसमें किले का इतिहास दिखाया जाता है।

क्यों जाएं कुम्भलगढ़?

अगर आप इतिहास, प्रकृति और एडवेंचर पसंद करते हैं, तो कुम्भलगढ़ आपके लिए बेहतरीन जगह है। यहां की ऊंचाई से दिखने वाला दृश्य, विशाल दीवार और शांति भरा वातावरण हर किसी को आकर्षित करता है।

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Published on:
01 Apr 2026 06:50 pm
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