
राजसमंद: लावासरदारगढ़ एरिया के तहत आने वाले जेतपुरा गांव में बुधवार का दिन कभी न भूल पाने वाला दर्द दे गया। जयपुर में हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चंद्रप्रकाश पुत्र हीरालाल वागरिया और उनके तीन मासूम बेटों की चार अर्थियां जब एक साथ उठीं तो पूरा गांव शोक में डूब गया। पिता और तीन बेटों की एक साथ मौत की खबर ने जेतपुरा सहित आसपास के क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन हो गया।
जेतपुरा गांव में सुबह करीब 11 बजे जब चंद्रप्रकाश और उनके तीनों बेटों की चिताएं एक साथ जलीं तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। कुछ देर के लिए पूरा माहौल सन्नाटे में बदल गया। दोनों पुत्रों पुत्र दिनेश और रतन ने भारी मन और कांपते हाथों से अपने पिता और भाइयों को मुखाग्नि दी।
इस दौरान उनकी दर्द भरी पुकार ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर दिया। "ओ पापा…अबे माको काई वेई की करू" जैसी करुण आवाजें सुनकर लोगों का कलेजा दहल उठा। मृतक चंद्रप्रकाश के 90 वर्षीय पिता हीरालाल अपने बेटे और पौत्रों के शव देखकर पूरी तरह टूट गए। रोते हुए वे बार-बार अपनी पीड़ा व्यक्त करते रहे। यह मार्मिक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े।
इस दर्दनाक हादसे ने चंद्रप्रकाश के परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है। परिवार में अब उनके दो नाबालिग पुत्र ही शेष रह गए हैं। इनमें एक पुत्र विकलांग है, जबकि दूसरा 13 वर्ष का है। दोनों बच्चे पिता और भाइयों को खोने के गम में बेसुध हैं। परिवार का सहारा छिन गया है और अब बुजुर्ग दादा ही उनके लिए एकमात्र सहारा हैं।
जब चारों मृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए जेतपुरा पहुंचे तो परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें सांत्वना देने का प्रयास करते रहे। लेकिन अपनों को खोने का दर्द इतना गहरा था कि कोई भी खुद को संभाल नहीं पा रहा था।
मूल रूप से जेतपुरा निवासी चंद्रप्रकाश पुत्र हीरालाल वागरिया गरीब परिवार से थे और झाड़ू बनाने का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। वे आसपास के क्षेत्रों से खजूर की डालियां एकत्रित कर जयपुर ले जाते थे, जहां परिवार के साथ मिलकर झाड़ू बनाकर बेचते और अपनी आजीविका चलाते थे।
चंद्रप्रकाश अपनी पत्नी कैलाशी और तीनों पुत्रों के साथ करीब एक महीने पहले झाड़ू बेचने के लिए जयपुर गए थे। बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां समाप्त होने के बाद परिवार जेतपुरा लौट रहा था। लेकिन रास्ते में हुए दर्दनाक हादसे ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।
जयपुर के अजमेर रोड स्थित 200 फीट बाइपास क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में जेतपुरा निवासी चंद्रप्रकाश पुत्र हीरालाल वागरिया और उनके तीन मासूम बेटों गोपाल (10), रमेश (11) और दीपक (8) की मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार, चंद्रप्रकाश अपने तीनों बेटों के साथ जयपुर से जेतपुरा लौटने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे।
इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेलर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में चारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चंद्रप्रकाश की पत्नी कैलाशी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनका जयपुर में इलाज जारी है। हादसा इतना भयावह था कि बच्चों के शव कई मीटर दूर नाले और डिवाइडर तक जा गिरे थे। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डूबो दिया है।
जयपुर के अजमेर रोड स्थित 200 फीट बाईपास पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जैतपुरा निवासी चंद्रप्रकाश वागरिया और उनके तीन मासूम बच्चों की मौत तथा पत्नी के गंभीर घायल होने की घटना पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दुख जताया। बुधवार को उन्होंने मृतक के बड़े भाई मीठालाल से फोन पर बात कर परिवार को सांत्वना दी और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
बिरला ने बताया कि समाचार मिलने के बाद उन्होंने प्रशासन और चिकित्सा अधिकारियों से संपर्क कर घायल महिला के उपचार की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने पीड़ित परिवार को राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपए सहायता दिलाने की जानकारी दी।
साथ ही जनसहयोग से परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने और निजी अस्पताल के सहयोग से घायल महिला को आजीवन प्रतिमाह 10 हजार रुपए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। बातचीत में सामने आया कि हादसे के समय परिवार के दो अन्य बच्चे घर पर थे, जिनमें एक दिव्यांग है। बिरला ने दोनों बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य की जिम्मेदारी में सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और सहायता कार्य संवेदनशीलता से पूरा करने के निर्देश दिए।