Rajsamand Police Action: राजसमंद की रातें इन दिनों कुछ अलग हैं खामोश, मगर सतर्क। सड़कों पर सन्नाटा है, लेकिन इस सन्नाटे के पीछे एक बड़ी हलचल चल रही है। यह कहानी है उस विशेष अभियान की, जिसने जिले के अपराध जगत में हलचल मचा दी है।
Rajsamand Police Action: राजसमंद की रातें इन दिनों कुछ अलग हैं खामोश, मगर सतर्क। सड़कों पर सन्नाटा है, लेकिन इस सन्नाटे के पीछे एक बड़ी हलचल चल रही है। यह कहानी है उस विशेष अभियान की, जिसने जिले के अपराध जगत में हलचल मचा दी है।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जब वांछित अपराधियों के खिलाफ शिकंजा कसने का अभियान शुरू हुआ, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि इसका असर इतना व्यापक होगा। मगर पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल के नेतृत्व में जिला पुलिस ने इसे एक मिशन बना लिया। हर थाने की टीम मैदान में उतरी, और परिणाम सामने हैं—अप्रैल माह में अब तक कुल 252 अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचाए जा चुके हैं।
बीते 24 घंटों की कहानी भी कम रोमांचक नहीं। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस की टीमें एक के बाद एक दबिश देती रहीं। राजनगर ने सबसे आगे रहते हुए 5 अपराधियों को पकड़ा, वहीं कांकरोली और नाथद्वारा से 2-2 और केलवा व देवगढ़ से 1-1 अपराधी गिरफ्तार किए गए। कुल मिलाकर 11 वांछित अपराधियों को एक ही दिन में पकड़ लिया गया।
इस अभियान की गूंज आंकड़ों में भी साफ सुनाई देती है। अब तक पकड़े गए 252 अपराधियों में 203 स्थायी वारंटी हैं, 20 गिरफ्तारी वारंटी के तहत हैं, 28 विभिन्न प्रकरणों में वांछित थे और 1 अन्य श्रेणी में आता है। लेकिन इन आंकड़ों के पीछे छिपी सच्चाई और भी गंभीर है—इनमें कई अपराधी हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों में शामिल रहे हैं।
थानों की बात करें तो नाथद्वारा ने 37 गिरफ्तारियों के साथ सबसे आगे रहते हुए अभियान की कमान संभाली, रेलमगरा ने 32 और राजनगर ने 22 अपराधियों को गिरफ्तार कर मजबूत योगदान दिया। वहीं कुंवारिया, देलवाड़ा और खमनोर जैसे क्षेत्रों में भी पुलिस टीमों ने उल्लेखनीय कार्य किया।
इस पूरी कार्रवाई के पीछे एक स्पष्ट संदेश है—जिले में अपराध के लिए कोई जगह नहीं। पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल ने साफ कहा है कि यह अभियान ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का हिस्सा है और जिले में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह लगातार जारी रहेगा।