भीलवाड़ा ज़िले के खाखला और टपरिया खेड़ी गांवों से आई 50 किशोरियों ने रविवार को राजसमंद में ऐसा संकल्प लिया, जो समाज की सोच को झकझोर देने वाला है।
राजसमंद. भीलवाड़ा ज़िले के खाखला और टपरिया खेड़ी गांवों से आई 50 किशोरियों ने रविवार को राजसमंद में ऐसा संकल्प लिया, जो समाज की सोच को झकझोर देने वाला है। ये सभी किशोरियां बाल विवाह की कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए एकजुट हुईं और बुलंद आवाज़ में ऐलान किया कि अब हम चुप नहीं रहेंगे, हम बदलेंगे अपने गांव की तस्वीर। यह पहल जन विकास संस्थान और गर्ल्स नॉट ब्राइड्स के सहयोग से चल रही “मी डिसाइड परियोजना” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किशोरियों को जागरूक और सशक्त बनाकर उन्हें सामाजिक बदलाव की अग्रदूत बनाना है।
बैठक में जुटी इन 50 किशोरियों ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने तय किया कि अब वे अपने परिवारों को समझाएंगी, माता-पिता को बाल विवाह के दुष्परिणाम बताएंगी और पंचायत व विद्यालय का सहयोग लेकर हर स्तर पर कदम बढ़ाएंगी। उनकी कार्ययोजना में यह भी शामिल है कि वे अपनी सहेलियों और अन्य किशोरियों को जागरूक करेंगी, ताकि कोई लड़कीजल्दबाज़ी में विवाह की शिकार न बने। यह सामूहिक संकल्प अब पूरे गांव में बदलाव की नींव रखने वाला साबित हो सकता है।
संस्थान की निदेशक शकुंतला पमेचा ने किशोरियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि हमें समाज बदलना है, तो सबसे पहले हमें सशक्त बनना होगा और शिक्षा ही इसका असली हथियार है। पढ़ाई-लिखाई से ही हम अपनी आवाज़ बुलंद कर सकते हैं। इसी क्रम में परियोजना से जुड़ी नीता कुमावत ने भी किशोरियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी बुराई को मिटाने के लिए निरंतर संघर्ष करना होगा। पंचायतों, विद्यालयों और पूरे समुदाय का सहयोग इस लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत है।
इस आयोजन में उमा शर्मा और ललिता शर्मा की अहम भूमिका रही। उनका कहना था कि किशोरियों का यह साहसिक कदम सिर्फ एक शुरुआत है। यह पहल यदि गांव-गांव तक पहुँची, तो राजस्थान में बाल विवाह की परंपरा को जड़ से खत्म करने की ठोस नींव रखी जा सकती है।