Rampur News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को शत्रु संपत्ति मामले में बढ़ी धाराओं में एमपी-एमएलए कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि दो पैन कार्ड मामले में सजा के चलते फिलहाल उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी।
Azam Khan Bail: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को शत्रु संपत्ति मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने उनके खिलाफ बढ़ाई गई धाराओं में जमानत मंजूर कर ली है। हालांकि कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद फिलहाल उनकी जेल से रिहाई संभव नहीं हो सकेगी, क्योंकि दो पैन कार्ड मामले में उन्हें पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
शत्रु संपत्ति मामले में पुलिस ने जांच के दौरान भारतीय दंड संहिता की तीन गंभीर धाराएं बढ़ाई थीं। इन धाराओं में जमानत पाने के लिए आजम खान ने पहले एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन 23 अप्रैल को उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर कर ली।
यह मामला रामपुर के सिविल लाइंस थाने में वर्ष 2020 में दर्ज किया गया था। कलक्ट्रेट रिकॉर्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि शत्रु संपत्ति के दस्तावेजों में छेड़छाड़ और फर्जीवाड़ा किया गया है। रिपोर्ट में आरोप था कि सरकारी अभिलेखों को नुकसान पहुंचाकर संपत्ति पर अवैध तरीके से कब्जा करने की कोशिश की गई।
जिस शत्रु संपत्ति को लेकर यह मुकदमा दर्ज हुआ, वह आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास स्थित बताई गई थी। यह संपत्ति पहले इमामुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी, जो देश विभाजन के दौरान पाकिस्तान चले गए थे। बाद में वर्ष 2006 में इस जमीन को राजस्व अभिलेखों में शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि बाद में रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर दूसरे लोगों का नाम दर्ज कराया गया।
पुलिस जांच के दौरान राजस्व विभाग के दस्तावेजों में कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच अधिकारियों के मुताबिक रिकॉर्ड के कुछ पन्ने फटे हुए मिले और कई प्रविष्टियों में बदलाव के संकेत पाए गए। आरोप है कि सैयद आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया था। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने दस्तावेजों से जुड़ी फोरेंसिक और प्रशासनिक जांच भी कराई थी।
इस मामले में आजम खान के साथ उनकी पत्नी और पूर्व सांसद डॉ. तंजीम फात्मा, बेटे अब्दुल्ला आजम तथा जौहर ट्रस्ट से जुड़े अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। जांच एजेंसियों का कहना था कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य आजम खान के परिवार से जुड़े हुए हैं। इसी आधार पर पुलिस ने पूरे मामले को संगठित साजिश के रूप में पेश किया।
मुकदमे में कलक्ट्रेट के सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवंत को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में वह सरकारी गवाह बन गए। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने आगे की विवेचना करते हुए आजम खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 467, 471 और 201 को चार्जशीट में शामिल किया। इन धाराओं में फर्जी दस्तावेज तैयार करना, फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
हालांकि शत्रु संपत्ति मामले में जमानत मिलने के बाद आजम खान को राहत जरूर मिली है, लेकिन जेल से उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है। वजह यह है कि दो पैन कार्ड मामले में उन्हें पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। इस मामले में उनकी अपील भी मजिस्ट्रेट कोर्ट से खारिज हो चुकी है। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।
सोमवार को आजम खान से जुड़े कई अन्य मामलों में भी अदालत में सुनवाई हुई। इनमें नफरती भाषण, डूंगरपुर प्रकरण, यतीमखाना बस्ती और फरहान मामले शामिल हैं। टांडा थाने में दर्ज नफरती भाषण मामले में फोटोग्राफर पंकज की गवाही हुई और अब अगली सुनवाई 13 मई को तय की गई है।
डूंगरपुर मामले में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 मई की तारीख निर्धारित की है। वहीं यतीमखाना मामले की सुनवाई अब 9 जून को होगी। फरहान मामले में भी सुनवाई हुई, जिसके लिए अदालत ने 20 मई की अगली तारीख तय की है। लगातार कई मामलों में चल रही सुनवाई के कारण आजम खान की कानूनी मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं।