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सिंघम IPS अजय पाल शर्मा के पहुंचने के बाद डगमगाया था आजम खान का दबदबा, रामपुर में बदल कैसे गया ‘पावर गेम’

IPS Ajay Pal Sharma And Azam Khan News: सिंघम IPS अजय पाल शर्मा के पहुंचने के बाद आजम खान का दबदबा डगमगाया था। जानिए रामपुर में कैसे पावर गेम देखते ही देखते बदल गया?

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how azam khan affected after arrival of singham ips ajay pal sharma rampur news

IPS अजय पाल शर्मा के पहुंचने के बाद डगमगाया था आजम खान का दबदबा। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

IPS Ajay Pal Sharma And Azam Khan News:उत्तर प्रदेश के चर्चित IPS अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव में चुनाव आयोग की ओर से ऑब्जर्वर के तौर पर तैनाती के बाद उनके सख्त तेवर वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कड़क प्रशासनिक शैली और बेबाक फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले अजय पाल शर्मा का नाम एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उनकी पहचान सिर्फ मौजूदा सक्रियता तक सीमित नहीं है। रामपुर में उनकी पोस्टिंग का वह दौर आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में गिना जाता है, जब सपा के कद्दावर नेता आजम खान (Azam Khan) के मजबूत गढ़ में प्रशासनिक कार्रवाई ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था।

2019 में रामपुर पोस्टिंग बनी टर्निंग प्वाइंट

साल 2019 रामपुर की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जाता है। लोकसभा चुनाव में सांसद बनने के बाद आजम खान का प्रभाव चरम पर माना जा रहा था, लेकिन इसी बीच जिले में कप्तान के रूप में अजय पाल शर्मा की तैनाती हुई और हालात तेजी से बदलने लगे। उनकी एंट्री को उस दौर की सबसे अहम प्रशासनिक घटनाओं में गिना गया। माना गया कि यहीं से रामपुर की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई।

भू-माफिया घोषित करने की कार्रवाई ने मचाई हलचल

जुलाई 2019 में जिला प्रशासन ने आजम खान का नाम सरकार के एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की। आरोप था कि किसानों और सरकारी जमीन पर कब्जे के जरिए मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) के लिए भूमि ली गई। यह कदम सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया। पहली बार इतने बड़े राजनीतिक चेहरे पर इस तरह सार्वजनिक रूप से शिकंजा कसता दिखाई दिया।

80 से ज्यादा मुकदमों ने बढ़ाया दबाव

इसी दौरान आजम खान, उनकी पत्नी ताजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम पर मुकदमों की बाढ़ आ गई। साल के अंत तक 80 से अधिक मामले दर्ज होने की चर्चा रही।इनमें धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, धमकी, अतिक्रमण और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। किसानों की शिकायतों के आधार पर कई मामलों में कार्रवाई तेज हुई।

जौहर यूनिवर्सिटी बनी जांच के केंद्र में

आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर कई शिकायतें सामने आईं। आरोप लगा कि किसानों की जमीन दबाव में परियोजना में शामिल कराई गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई तेज हुई। अजय पाल शर्मा की अगुवाई में जांच और कानूनी प्रक्रिया ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी।

घर पर नोटिस चस्पा होने से बना बड़ा संदेश

रामपुर की राजनीति में वह दृश्य भी चर्चा में रहा, जब अदालत के समन लेने के लिए आरोपी पक्ष उपलब्ध न होने पर पुलिस ने घर पर नोटिस चस्पा किए। इसे प्रतीकात्मक रूप से बेहद बड़ी कार्रवाई माना गया। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे प्रशासनिक दबाव का खुला संकेत बताया।

सुरक्षा और नियमों पर भी भेजे गए नोटिस

आजम खान और उनके बेटे को मिली Y श्रेणी सुरक्षा को लेकर भी नोटिस भेजे गए। प्रशासन ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर सवाल उठाए। यह घटनाक्रम भी राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव के तौर पर देखा गया।

अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

अगस्त 2019 में आजम खान परिवार से जुड़े एक रिजॉर्ट पर कार्रवाई ने और सुर्खियां बटोरीं। सिंचाई विभाग की जमीन घेरकर निर्माण का आरोप लगाते हुए बुलडोजर चलाया गया। इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया कि प्रशासन किसी तरह की नरमी के मूड में नहीं है।

सख्त छवि से बनाई अलग पहचान

बतौर पुलिस कप्तान अजय पाल शर्मा लगातार सार्वजनिक तौर पर कहते रहे कि पुराने मामलों की समीक्षा होगी और हर शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी। उनकी इसी सख्त और आक्रामक कार्यशैली ने उन्हें ‘सिंघम’ छवि दिलाई और रामपुर में प्रशासनिक चुनौती का चेहरा बना दिया।

फिर बदल गई रामपुर की राजनीति

2019 के बाद रामपुर की राजनीति में तेजी से बदलाव देखा गया। कभी निर्विवाद दबदबा रखने वाले आजम खान और उनका परिवार लगातार कानूनी लड़ाइयों में उलझा रहा। विश्लेषकों का मानना है कि उस दौर की प्रशासनिक सख्ती ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को स्थायी रूप से प्रभावित किया।

आज भी चर्चा में है रामपुर मॉडल

आज जब अजय पाल शर्मा फिर सुर्खियों में हैं, तो रामपुर पोस्टिंग के वे फैसले एक बार फिर चर्चा में लौट आए हैं। समर्थक इसे सख्त प्रशासन का उदाहरण मानते हैं, तो विरोधी इसे राजनीतिक असर वाला दौर बताते हैं, लेकिन इतना तय है कि रामपुर में उनकी तैनाती ने प्रशासन और राजनीति के रिश्तों पर गहरी छाप छोड़ी।