
Jauhar University Demolition Case Row Rampur: मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर जमात-ए-इस्लामी हिंद (जेआईएच) ने अपनी चिंता जताई है। संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का दौरा कर प्रशासन, शिक्षकों और छात्रों से मुलाकात की तथा जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर ध्वस्तीकरण आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि कार्रवाई होती है तो इसका सबसे बड़ा असर हजारों छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में आग्रह किया कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की बुलडोजर या ध्वस्तीकरण कार्रवाई को तत्काल रोका जाए। संगठन ने कहा कि छात्रों के शिक्षा के अधिकार और संस्थान के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को मामले में संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए।
संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय की कुल 40 इमारतों में से 38 को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। यदि इस पर अमल होता है तो संस्थान का अधिकांश ढांचा समाप्त हो जाएगा। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इससे करीब 3,000 छात्रों की शिक्षा प्रभावित होगी और उनके शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने कहा कि ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर 30 जुलाई की समय-सीमा काफी नजदीक है। ऐसे में यदि समय रहते कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई तो परिसर में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हो सकती है, जिससे छात्रों और विश्वविद्यालय दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संगठन ने सुझाव दिया कि इस पूरे मामले को सक्षम न्यायालय के समक्ष रखा जाए, ताकि ध्वस्तीकरण आदेश की वैधता और विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए अधिकार क्षेत्र संबंधी सवालों का समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से हो सके। उनका कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी तरह की कार्रवाई उचित नहीं होगी।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संगठन के मुताबिक, इनमें कई विद्यार्थियों को शुल्क में रियायत भी दी जाती है। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय का ढांचा प्रभावित होता है तो सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं छात्रों को होगा।
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से आग्रह किया कि ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई के बजाय नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) जैसे वैकल्पिक समाधान पर विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई के कारण किसी भी छात्र की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए और ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में जमात-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय सचिव मौलाना मोहम्मद शफी मदनी, मोहम्मद अहमद, सहायक सचिव इनामुर्रहमान, उत्तर प्रदेश पश्चिम के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना जमीरुल हसन फलाही, रामपुर इकाई के अध्यक्ष मौलाना अब्दुस्सलाम बस्तवी और वरिष्ठ पत्रकार सैयद खलीक अहमद शामिल रहे।