
आजम खान पर कानूनी शिकंजा..
Azam Khan News: रामपुर की जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों का रिकॉर्ड भी खंगाला है। कार्रवाई शुरू करने से पहले ईडी ने रामपुर पुलिस से आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी मांगी थी। पुलिस ने आजम खां पर दर्ज 84 मुकदमों से संबंधित एफआईआर, चार्जशीट और अन्य रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए थे।
सूत्रों के अनुसार, करीब 20 दिन पहले ईडी ने रामपुर पुलिस से आजम खां और उनके परिवार से जुड़े मुकदमों का पूरा विवरण मांगा था। इसके बाद पुलिस की ओर से संबंधित मामलों की एफआईआर और चार्जशीट की प्रतियां सहित उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी भेजी गई। माना जा रहा है कि जांच एजेंसी ने मौजूदा कार्रवाई से पहले पुराने मामलों की जानकारी इसलिए जुटाई, ताकि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों को पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाया जा सके।
ईडी की मौजूदा कार्रवाई का प्रमुख केंद्र जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन हैं। बुधवार को जांच एजेंसी की टीम ने विश्वविद्यालय परिसर के अलावा आजम खां के करीबियों और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। टीम ने ट्रस्ट की आय-व्यय, वित्तीय लेनदेन, दान और विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत से संबंधित दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की।
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में खर्च हुई करीब 494 करोड़ रुपये की रकम के स्रोत को लेकर भी जांच का दायरा बढ़ा है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल धन कहां से आया और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों में उसका किस तरह इस्तेमाल हुआ। जांच के दौरान आय, खर्च और दान से जुड़े रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है।
ईडी और आयकर विभाग की कार्रवाई के बीच आजम खां से जुड़े पुराने मामले भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इनमें जल निगम भर्ती से जुड़ा मामला और रामपुर में सीवरेज सिस्टम के निर्माण से संबंधित मामला शामिल है। आजम खां के मंत्री रहते जल निगम में हुई भर्तियों को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इस मामले में जांच के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी।
आजम खां के जल निगम का अध्यक्ष रहने के दौरान हुई भर्तियों को लेकर वर्ष 2022 में लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में जांच एजेंसियां भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करती रही हैं। ईडी ने अपने स्तर पर चल रही जांच के दौरान रामपुर पुलिस से आजम खां के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों की जानकारी भी मांगी थी।
रामपुर में सीवरेज सिस्टम के निर्माण से जुड़ा मामला भी आजम खां की कानूनी चुनौतियों में शामिल है। इस प्रकरण में निर्माण कार्य के दौरान नियमों की अनदेखी और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। अलग-अलग मामलों की जांच के बीच अब केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण इन पुराने प्रकरणों पर भी फिर से चर्चा तेज हो गई है।
जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित मामलों में प्रवर्तन निदेशालय की जांच पहले से चलती रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी की ओर से वर्ष 2019 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय के निर्माण, जमीन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच का सिलसिला आगे बढ़ा।
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण को लेकर सरकारी जमीन और शत्रु संपत्ति पर कब्जे से संबंधित आरोपों को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के बीच विश्वविद्यालय के निर्माण में हुए बड़े खर्च और उसके स्रोत को लेकर सवाल उठे। जांच एजेंसियों ने समय-समय पर इससे जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की है।
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए बाहरी लोगों से मिले आर्थिक सहयोग को लेकर भी जांच का पहलू सामने आया है। इस दौरान धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी पृष्ठभूमि में आयकर विभाग और ईडी की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आजम खां और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में आयकर विभाग पहले भी कार्रवाई कर चुका है। वर्ष 2023 में आयकर विभाग की टीम ने आजम खां के आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। यह कार्रवाई करीब तीन दिनों तक चली थी। इस दौरान अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों से दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य कागजात की जांच की थी।
2023 की आयकर कार्रवाई के दौरान आजम खां के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों और संस्थानों से संबंधित कई स्थानों पर भी टीम पहुंची थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की पड़ताल की थी। उस समय रामपुर में इस कार्रवाई को लेकर काफी हलचल देखने को मिली थी।
आजम खां और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में इससे पहले वर्ष 2022 में भी ईडी की कार्रवाई सामने आई थी। अब वर्ष 2026 में दोबारा जांच तेज होने के बाद पुराने मामलों और केंद्रीय एजेंसियों की पिछली कार्रवाइयों को भी जोड़कर देखा जा रहा है।
ईडी की अलग-अलग टीमों ने विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर जांच की। अधिकारी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल करते रहे, जबकि सुरक्षा बल लगातार निगरानी में जुटे रहे। परिसर के भीतर सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही भी बनी रही। कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ गई।
ईडी की कार्रवाई देर शाम तक चलती रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती जारी रही। मौके पर सीओ टांडा पंकज पंत भी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। हालांकि कार्रवाई को लेकर ईडी या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी तत्काल सामने नहीं आई।
जौहर यूनिवर्सिटी के अलावा ईडी की टीम ने रामपुर के पीपल टोला स्थित सीके एसोसिएट के कार्यालय और आवास पर भी कार्रवाई की। यहां भी सीआरपीएफ के जवानों की मौजूदगी में जांच की गई। इसके साथ ही शौकत अली रोड स्थित एक अन्य ठिकाने पर भी जांच एजेंसी की कार्रवाई हुई।
ईडी द्वारा कार्रवाई से पहले आजम खां पर दर्ज 84 मुकदमों का रिकॉर्ड मंगाए जाने को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने इन मामलों से संबंधित एफआईआर और चार्जशीट की प्रतियां जांच एजेंसी को भेजी थीं। साथ ही मामलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई थी। इससे ईडी के पास आजम खां से जुड़े पुराने कानूनी मामलों का विस्तृत रिकॉर्ड पहुंच गया।
जानकारों के अनुसार, अलग-अलग मामलों में चल रही जांच और कानूनी कार्रवाई का असर आगे भी देखने को मिल सकता है। यदि जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच में कोई नया तथ्य सामने आता है, तो आजम खां की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल ईडी वित्तीय लेनदेन, ट्रस्ट की गतिविधियों और निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
फिलहाल केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। ईडी किन दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर आगे कार्रवाई करती है, इस पर अब सभी की नजर है। 84 पुराने मुकदमों का रिकॉर्ड, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेनदेन और 494 करोड़ रुपये के खर्च के स्रोत की जांच आने वाले समय में इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना सकती है।
Updated on:
20 Aug 2026 05:57 pm
Published on:
20 Aug 2026 05:57 pm
