
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर अवमानना का आरोप लगाते हुए नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से पांच के भीतर जवाब तलब किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि उसके आदेश का पालन हुआ है या फिर नहीं। बता दें कि कोर्ट ने आजम खान की जमानत के लिए जौहर यूनिवर्सिटी से सटी भूमि कुर्क करने पर सशर्त रोक लगाई थी। शत्रु संपत्ति कानून के तहत इस भूमि को जब्त किया गया था। इस पर आजम खान की तरफ से शिकायत लगाई गई कि कोर्ट स्टे आर्डर के बावजूद जमीन से फेंसिंग नहीं हटाने के चलते यूनिवर्सिटी का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने इस मामले में योगी सरकार को 19 जुलाई तक नोटिस का जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की है। बता दें कि इससे पूर्व सर्वोच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने 27 मई को हाईकोर्ट की शर्त पर रोक लगाई थी। वहीं, हाईकोर्ट ने सपा नेता आजम खान की जमानत शर्त के आधार पर रामपुर कलेक्टर को निर्देश जारी किए थे कि जौहर यूनिवर्सिटी परिसर से लगी भूमि को योगी सरकार कब्जे में लें।
आजम खान के वकील कपिल सिब्बल ने दी दलील
सपा नेता आजम खान की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि 27 जून को जौहर यूनिवर्सिटी पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी का मार्ग बंद कर दिया। यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर तारों से फेंसिंग कर दी गई है। इस कारण यूनिवर्सिटी में कोई प्रवेश नहीं कर सकता है। इससे यूनिवर्सिटी का कामकाज ठप हो गया है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करने को कहा
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि आजम खान अगर इसे कोर्ट को अवमानना मानते हैं तो इस पर अपनी अर्जी दाखिल कर सकते हैं। न्यायालय ने दोनों दोनो पक्षों से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इसकी अगली सुनवाई अब 22 जुलाई को की जाएगी।