UPPCS Result 2026: UPPCS परीक्षा 2026 में नेहा सागर और विजेंद्र सिंह ने नायब तहसीलदार बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग से मिली इस सफलता ने युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।
UPPCS Neha Sagar: अमरोहा और रामपुर जनपद के लिए गर्व की बात सामने आई है, जहां नेहा सागर और गजरौला के विजेंद्र सिंह ने यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर नायब तहसीलदार का पद हासिल किया है। इस उपलब्धि से दोनों के परिवारों में खुशी का माहौल है और क्षेत्र में जश्न मनाया जा रहा है। नेहा सागर का बचपन से ही अधिकारी बनने का सपना था, जो अब मेहनत और लगन के दम पर साकार हो गया है।
शहर के मुहल्ला सराय कोहना निवासी और वर्तमान में रामपुर की सिंह कॉलोनी में रहने वाली नेहा सागर, स्वर्गीय चंद्र मोहन सागर की बेटी हैं। वह पेशे से शिक्षिका हैं और अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, भाई और पति को देती हैं। उनका कहना है कि निरंतर प्रयास और परिवार का साथ ही उनकी सफलता की असली कुंजी रहा है।
नेहा सागर चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और उनका परिवार शिक्षा व सेवा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी बड़ी बहन कल्पना गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, जबकि दूसरी बहन अल्पना सागर इंजीनियर हैं। उनके भाई त्रिवेंद्र मोहन ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति आयुष गौतम एनसीआरटीसी में डीजीएम हैं, जिससे उन्हें हमेशा प्रेरणा और समर्थन मिलता रहा।
नेहा सागर बताती हैं कि उनकी पढ़ाई बिलासपुर से पूरी हुई और वर्तमान में वे प्राथमिक विद्यालय बिलासपुर में सहायक अध्यापक हैं। उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पिता के निधन के बाद परिवार पर संकट आया, लेकिन मां और भाई ने हिम्मत बनाए रखी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
गजरौला के विजेंद्र सिंह ने भी यूपीपीसीएस परीक्षा पास कर नायब तहसीलदार का पद प्राप्त किया है। वह पूर्व विधायक हरपाल सिंह के भतीजे हैं और भाजपा नेता विपिन सागर के छोटे भाई हैं। उनकी सफलता से परिवार और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
विजेंद्र सिंह की सफलता पर उनके परिवार ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। उनकी मां जयवंती देवी बेटे की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। वहीं, विजेंद्र सिंह का लक्ष्य आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना है और इसके लिए वे लगातार प्रयासरत हैं। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।