Birth Certificate: जन्मतिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं रहेगा इसके लिए अलग से डॉक्यूमेंट देना होगा।
Birth Certificate: टीडीएस के चालान जमा करते समय अब टैक्स ईयर का सही चयन करना जरूरी हो गया है, क्योंकि इसमें गलती होने पर आगे चलकर परेशानी हो सकती है। यह जानकारी प्रमुख वक्ता सीए मनीष गुगालिया ने दी। वे कर सलाहकार परिषद की ओर से नए आयकर कानून 2025 में महत्वपूर्ण परिवर्तन एवं जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील एवं अन्य कानूनी प्रकिया के विषय को लेकर आयोजित मासिक स्टडी सर्किल मीटिंग को संबोधित कर रहे थे। जिसमे प्रमुख वक्ता सीए मनीष गुगलिया एवं सीए अंचल मूणत रहें।
उन्होंने बताया कि अब फार्म 15 जी एवं 15 एच की जगह नया फार्म 121 लागू कर दिया गया है, जिसमें डिजिटल सबमिशन को प्राथमिकता दी गई है और इसे एआयएस से भी लिंक किया गया है। परिषद् के सचिव राकेश भटेवरा ने आयकर के नए फॉर्म्स एवं अध्यक्ष अशोक भंडारी ने जीएसटी में हाल में आए परिवर्तनों के बारे में बताया। दोनों वक्ताओं को एसडी पुरोहित अवार्ड विवेक खंडेलवाल, गौरव चौरडिय़ा, गोपाल अग्रवाल एवं विशाल जोशी ने दिया। संचालन सचिव राकेश भटेवरा ने किया।
पैन कार्ड से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जहां पहले फार्म 49 जरूरी होता था, अब उसकी जगह फार्म 93 लागू किया गया है। पैन में नाम अब आधार के अनुसार ही रहेगा और उसमें बदलाव का विकल्प नहीं होगा, लेकिन माता या पिता का नाम चुनने का विकल्प रहेगा। वहीं दूसरी ओर जन्मतिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं रहेगा इसके लिए अलग से डॉक्यूमेंट देना होगा। नए नियमों के तहत जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या कुछ मामलों में एफिडेविट देना होगा। यानी अब पैन-आधार पहले के मुकाबले ज्यादा डॉक्यूमेंट आधारित हो जाएगा।
पहले 30 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी की जानकारी आयकर विभाग को दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर 45 लाख कर दिया है। इसके अलावा 2 लाख से अधिक के स्टॉम्प खरीदी पर भी रिपोर्टिंग होगी। यदि पैन नहीं है तो 1 लाख से अधिक की स्टॉम्प ड्यूटी पर भी जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी। अब 20 लाख तक की प्रॉपर्टी पर पैन देना जरूरी नहीं है। नए नियमों को ध्यान में रखते हुए अपने वित्तीय लेन-देन करें, क्योंकि अब एआयएस और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से हर ट्रांजेक्शन की निगरानी और भी सख्त हो गई है। और किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में नोटिस या पेनल्टी का कारण बन सकती है।
सीए अंचल मूणत ने बताया कि अब जीएसटी विवादों के निपटान के लिए एक प्रभावी अपीलीय मंच जीएसटी ट्रिब्यूनल उपलब्ध हो गया है। इसमें अपील 3 माह के भीतर करना आवश्यक है तथा अपील के समय 20 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट करना होगा। ट्रिब्यूनल में अपील की अधिकतम फीस रु 25,000 निर्धारित की गई है। विलंब होने पर उचित कारण के साथ कंडोनेशन का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक दिन की देरी का कारण देना आवश्यक होगा। साथ ही शो-कॉज नोटिस एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का समय पर प्रस्तुत करना जरूरी रहेगा और प्रोफेशनल्स के लिए ड्रेस कोड एवं प्रक्रिया संबंधी निर्देश भी निर्धारित किए गए ।