
रतलाम। शहर के गुलाब चक्कर में सांस्कृतिक गतिविधियों को मंच देने की पहल अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। 8 जून 2025 से शुरू हुए इस सिलसिले में अब तक 375 आयोजन निशुल्क हो चुके हैं। संगीत, काव्य पाठ और बैंड प्रस्तुतियों से गुलजार रहने वाले इस परिसर में अब कार्यक्रम करना मुफ्त नहीं रहेगा।
जिला प्रशासन ने आयोजन के लिए शुल्क लेने की तैयारी शुरू कर दी है। यानी अब तक निशुल्क मंच का लाभ लेने वालों को आगे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भुगतान करना पड़ सकता है। नई व्यवस्था दीपावली के बाद लागू होने की संभावना है।
हर महीने 24 हजार खर्च, आय का इंतजाम नहीं
गुलाब चक्कर में कार्यक्रमों के संचालन और परिसर के रखरखाव पर जिला प्रशासन हर महीने करीब 24 हजार रुपए खर्च कर रहा है। इसमें कर्मचारियों के वेतन और विद्युत सज्जा जैसे खर्च शामिल हैं। आयोजन लगातार हो रहे हैं, लेकिन इनके बदले प्रशासन को कोई आय नहीं हो रही। ऐसे में अब तक निशुल्क उपलब्ध इस मंच के लिए शुल्क आधारित बुकिंग व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
सांस्कृतिक मंच की पहुंच पर भी नजर
प्रशासन के सामने रखरखाव का खर्च निकालने के साथ इस मंच को सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सुलभ बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। शुल्क तय होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि छोटे आयोजकों और सांस्कृतिक समूहों पर इसका कितना असर पड़ेगा।
सितंबर में सबसे ज्यादा 36 आयोजन
गुलाब चक्कर पर सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति लोगों की रुचि का अंदाजा आयोजन के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 8 जून 2025 से अब तक यहां 375 कार्यक्रम हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 36 आयोजन पिछले माह सितंबर में हुए। संगीत, काव्य पाठ और बैंड प्रस्तुतियों के माध्यम से इस स्थान ने शहर में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक मंच उपलब्ध कराया है।
अब चुनौती, खर्च और सांस्कृतिक पहुंच में संतुलन
शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजनकर्ताओं पर कितना आर्थिक भार पड़ेगा और निशुल्क मंच की सुविधा से लाभ लेने वाले छोटे समूहों पर इसका क्या असर होगा। प्रशासन के सामने एक ओर रखरखाव का खर्च निकालने की चुनौती है, तो दूसरी ओर सांस्कृतिक गतिविधियों को सुलभ बनाए रखने की जिम्मेदारी भी। नई व्यवस्था का वास्तविक असर शुल्क तय होने और उसके नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस पर मंथन जारी
गुलाब चक्कर अब तक निशुल्क ही है, यहां भविष्य में आयोजन करने पर शुल्क लेने पर विचार किया जा रहा है। प्रतिमाह इसके रखरखाव पर बड़ी राशि व्यय हो रही है।
अरूण पाठक, प्रभारी अधिकारी, डूडा