
रतलाम। एक तरफ जिले के किसान खरीफ सीजन की तैयारी में लगे है, दूसरी तरफ अल नीनो El Nino का भी खतरा मंडराने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। ऐसे में किसानों को खरीफ सीजन के दौरान क्या करना चाहिए। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए सलाह दी है कि वे ऐसी स्थिति के लिए भी तैयार रहे।
गुरुवार सुबह से मौसम बदला आसमान पर बादल छाये ठंडी हवा ने राहत दी। दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई, पारा 39 डिग्री पर आ गया। जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है। अब किसानों को इंतजार है तो बस अच्छी बारिश का, लेकिन इस साल अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति बन सकती हैं, ऐसे में मानसून आने के बाद किसानों को पर्याप्त वर्षा होने पर बोवनी करने की सलाह कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ दे रहे हैं।
अल नीनो क्या है
इसका मतलब स्पेनिश भाषा में अल नीनो का अर्थ है "छोटा बच्चा" या "क्राइस्ट चाइल्ड"। पेरू के मछुआरों ने इसे ये नाम दिया क्योंकि इसका असर अक्सर क्रिसमस के आसपास दिखता है। अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं। भारत पर अल नीनो सक्रिय होने पर भारत में मानसून कमजोर हो जाता है। औसत से कम बारिश, सूखा और भीषण गर्मी पड़ती है। फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
ये करे उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश त्रिपाठी के अनुसार उत्पादन में स्थिरता के लिए सस्य क्रियाओं का पालन आवश्यक है। पोषण प्रबंधन के लिए, अंतिम जुताई से पहले गोबर की खाद (5-10 टन प्रति हेक्टेयर) या मुर्गी की खाद (2.5 टन प्रति हेक्टेयर) खेत में फैलाकर अच्छी तरह मिला दें।
इन किस्मों का करें चयन
जलवायु क्षेत्र के लिए अनुकूल विभिन्न अवधि में पकने वाली न्यूनतम 2-3 नोटिफाइड सोयाबीन किस्मों का चयन कर बीज की उपलब्धता करें। जेएस-2433, एनआरसी-150, जेएस-2172, एनआरसी-142, जेएस-2303, जेएस-2309, एनआरसी-165, आरवीएसएम-1135 जैसी किस्मों को प्राथमिकता दें।
बुवाई से पहले अंकुरण परीक्षण करें
न्यूनतम 70 प्रतिशत अंकुरण होने पर ही बुवाई करें। सोयाबीन फसल की प्रारंभिक अवस्था में रोग और कीटों से बचाव के साथ-साथ उपयुक्त पौध संख्या निर्धारित करने के लिए फफूंदनाशक और कीटनाशक से बीजोपचार करना आवश्यक है। किसान एजोक्सीस्ट्रोबिन 2.5 प्रतिशत + थायोफिनेट मिथाइल 11.25 प्रतिशत + थायामेथोक्साम 25 प्रतिशत एफएस 10 मिली प्रति किलोग्राम बीज या अन्य अनुमोदित रसायनों का एक्सपेरिमेंट करें।
इनका कहना है…
किसान अपने क्षेत्र में मानसून का आगमन होने तथा कम से कम 100 मिलीमीटर वर्षा होने पर ही सोयाबीन की बुवाई करें। अल नीनो के कारण सूखे की संभावित स्थिति का जोखिम कम करने के लिए कम या मध्यम अवधि वाली एक से अधिक किस्मों की खेती और नमी संरक्षण तकनीक वाले बुवाई यंत्र जैसे बीबीएफ, रिज फरो या रेज बेड का उपयोग करें।
डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप तिवारी, पौध संरक्षण विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र