रतलाम

Ratlam News: कभी PM आवास था आशियाना, अब बंद सुलभ शौचालय में गुजर रही जिंदगी, सड़क किनारे पढ़ने को मजबूर मासूम

PM Awas eviction: पीएम आवास से बेदखली के बाद मजदूर परिवार का ठिकाना बंद पड़ा सुलभ शौचालय बन गया। बारिश के बीच तीन मासूम सड़क किनारे पढ़ रहे हैं, परिवार बदहाली में जिंदगी काट रहा है।
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Aug 08, 2026
family forced to live in public toilet after pm awas eviction
PM Awas eviction: रतलाम में सुलभ शौचालय में मजबूर तीन बच्चों का परिवार (फोटो सोर्स- Patrika)

Ratlam News: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से चौंका देने वाली खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) की मल्टी में करीब 4-5 साल तक अपने आशियाने में रहने वाला परिवार अचानक इस बारिश में किसी शासकीय सुलभ शौचालय में शरण लेने को मजबूर गया है।

जावरा रोड स्थित एक बंद पड़े सुलभ शौचालय में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां असलम (अनवर हुसैन) अपनी पत्नीऔर तीन मासूम बच्चों के साथ रहने को मजबूर है। बच्चे सड़क किनारे पढ़ाई कर रहे हैं और पूरा परिवार बदहाली के दिन काट रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह इस गरीब परिवार की असली लाचारी है या फिर यह नेताओं व जनता की सहानुभूति बंटोरने का कोई तरीका?

किस्त नहीं चुका पाए तो प्रसाशन ने आवास किया सील, शौचालय में रहने को मजबूर

दरअसल, रतलाम के डोसी गांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना की मल्टी में रह रहे कई परिवारों ने पिछले 4-5 सालों से अपने अंशदान या बैंक लोन की बकाया राशि जमा नहीं की थी। प्रति परिवार लगभग 1.80 लाख रुपए की राशि बकाया होने पर राज्य शासन ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्तको सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और 150 से अधिक बकायादार परिवारों को मल्टी से बाहर कर फ्लैटों को सील कर दिया। बेदखल किए गए लोगों का सामान नगर निगम ने सुरक्षित रखवा दिया गया है। पीड़ितों ने प्रशासनिक कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और महापौर व क्षेत्रीय विधायक पर बारिश के मौसम में गरीबों को बेघर करने का आरोप लगाया।

महापौर ने कहा- रहने की कराई गई है व्यवस्था

वहीं, दूसरी ओर महापौर का कहना है कि नगर निगम प्रशासन की ओर से बेघर हुए परिवारों के लिए 4 वैकल्पिक स्थानों पर रहने की समुचित व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बकायादारों को राहत देने के संबंध में राज्य शासन से भी चर्चा की जा रही है। बेदखली की इस कार्रवाई के बाद मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले असलम के पास जब सिर छिपाने की जगह नहीं बची तो उसने जावरा रोड स्थित बंद पड़े शासकीय सुलभ शौचालय को अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया। असलम का कहना है कि मजदूरी से इतनी कमाई नहीं होती कि वह एकमुश्त इतनी बड़ी बकाया राशि जमा कर सके।

Updated on:
08 Aug 2026 04:02 pm
Published on:
08 Aug 2026 04:02 pm