रतलाम

हमारी जिदंगी दूसरों को सुधारने में बर्बाद हो रही

चातुर्मास में श्रमण संघीय प्रवर्तक प्रकाश मुनि निर्भय ने मोहन टाकीज स्थित सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा
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Jain Saint news ratlam
चातुर्मास में श्रमण संघीय प्रवर्तक प्रकाश मुनि निर्भय ने मोहन टाकीज स्थित सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा

रतलाम। हमारी जिदंगी दूसरों को सुधारने में बर्बाद हो रही। संत दूसरों को समझाता है कि क्रोध, मान, माया, लोभ और राग-द्वेष मत करो। यदि वे खुद ये करेंगे, तो उनकी वाणी का असर कैसे होगा? ऐसे ही बच्चों को वंदना करने को सब कहते है, लेकिन खुद नहीं करते, तो वंदना कहां होगी। सभी दूसरों को सुधारने में लगे है, लेकिन इससे ना तो वे सुधरेंगे, ना हम सुधरेंगे।

यह उद्गार मालव केसरी गुरुदेव सौभाग्यमल के शिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक प्रकाश मुनि निर्भय ने व्यक्त किए। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि नासिक चातुर्मास के दौरान उनसे श्रावक ने ऐसा ही प्रश्न किया था कि प्रवचन में उपदेश देते है, क्रोध मत करो, अहंकार मत करो, लेकिन ये श्रावकों के लिए है या संतों के लिए भी है? इसका उत्तर था कि परमात्मा का उपदेश पहले साधुओं के लिए ही है, फिर श्रावक-श्राविकाओं के लिए है। पिता बीडी पिएगा, गुटका खाएगा और बेटे को मना करेगा, तो कोन सुनेगा। इसी प्रकार संत भी दूसरों को जो समझाते है, वह खुद नहीं करेंगे, तो वाणी का असर नहीं होगा।

सात्विक कर्म सदैव लाभकारी होते
प्रवर्तक ने कहा कि तीर्थंकर दीक्षा लेते है और मौन कर लेते है। जप, तप एवं साधना के मार्ग पर चलते है, तब उन्हें केवल्य ज्ञान प्राप्त होता है और वे अपनी देशना देते है। उनकी देशना सबके हित के लिए होती है, उससे सबकों आत्मा से जुडऩा चाहिए। मन, वचन और काया से किए गए सात्विक कर्म सदैव लाभकारी होते है। परमात्मा का ज्ञान हर छोटी बात की सीख देता है, इसका अनुसरण कर सबकों अपने कर्मों की निर्झरा करनी चाहिए।

सबकों धर्म का अवसर मिला हैं
प्रवर्तक ने कहा कि चातुर्मास में सबकों धर्म करने का अवसर मिला है। इसमें अधिक से अधिक साधना करना चाहिए। जप, तप, सामायिक, प्रतिक्रमण से आत्मा की शुद्धि होती है। यदि अवसर का लाभ नहीं लिया, तो समय निकल जाएगा और फिर पछताना पड़ेगा। परमात्मा ने जिस वात्सल्य भाव और करूणा से सबके भले के लिए देशना दी, उसी भाव से वे भी उपदेश कर रहे है।

ये रहे मंचासीन
उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका सुमनप्रभा ने भी संबोधित किया। प्रवर्तक ने कई तपस्वियों को विभिन्न तप आराधना के प्रत्याख्यान कराए। इस दौरान सेवाभावी दर्शनमुनि, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका सुमनप्रभा ठाणा-8 एवं महासती चंदनबाला एवं सेवाभावी कल्पना मंचासीन रहे।

ये रहे उपस्थित
संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री रखब चत्तर ने किया। इस दौरान धर्मदास जैन श्री संघ सदस्य, धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, सौभाग्य जैन महिला मंडल, सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

Updated on:
16 Aug 2026 10:22 pm
Published on:
16 Aug 2026 10:20 pm