हाल ही में रेलवे ने गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद श्रमिक एक्सपे्रस ट्रेन राज्यों की मांग पर चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए मजूदरों की यात्रा इतनी आसान भी नहीं है जितना दिख रहा है। इन शर्तो को राज्य अगर पूरा नहीं करते है तो मजदूरों के लिए परेशानी हो सकती है।
रतलाम. हाल ही में रेलवे ने गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद श्रमिक एक्सपे्रस ट्रेन राज्यों की मांग पर चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए मजूदरों की यात्रा इतनी आसान भी नहीं है जितना दिख रहा है। रेलवे ने 19 बिंदुओं की शर्ते इसके लिए जारी की है। इन शर्तो के पालन के साथ ही कोई ट्रेन चल पाएगी। इन शर्तो को राज्य अगर पूरा नहीं करते है तो मजदूरों के लिए परेशानी हो सकती है।
2 मई की देर शाम को रेलवे मंत्रालय ने इन शर्तो को जारी किया है। इसमें प्रमुख बात यही है कि राज्य के लिए एक से लेकर दो नोडल अधिकारी बनाए है। बड़ी बात यह है कि जिन मजदूरों को ट्रेन में बैठने की पात्रता रहेगी, उनके टिकट की दर कम से कम 1700 रुपए से अधिक की है। इसके अलावा प्रत्येक यात्री के टिकट का मूल्य पूर्व से ही देना होगा। यह राशि राज्य शासन वहन करेगी।
यह शर्त पूरी तो चलेगी भारतीय रेल
- सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश नोडल अधिकारी से सामजंस्य बिठाकर ट्रेन चलवा सकते है, लेकिन उनको स्टैंडर्ड नियम का पालन करना होगा।
- रेलवे ने जो नोडल अधिकारी बनाए है, चर्चा उनसे ही होगी, वे ही अंतिम निर्णय तय करेंगे।
- दो अलग-अलग राज्य के मजदूरों को लाने ले जाने के लिए राज्यों का सहमत होना जरूरी है। तब ही ट्रेन चलेगी।
- दो राज्यों की सहमती होने के बाद रैक उपलब्ध होने पर ही ट्रेन चलाई जाएगी।
- ट्रेन में 1200 से अधिक यात्री सफर नहीं करेंगे, कम से कम 90 प्रतिशत यात्री होना जरूरी है व ट्रेन चलने के बाद अंतिम स्टेशन पर ठहराव करेगी। बीच के स्टेशन पर न कोई चढेग़ा नहीं कोई उतरेगा।
- मजदूरों का चयन होने के बाद उनकी पूरी सूची रेलवे को देना अनिवार्य होगा।
- जब श्रमिक उतरेंगे तो उस स्टेशन पर लेने वालों की भीड़ नहीं आए, यह देखना राज्यों का कार्य होगा, जो श्रमिक स्वस्थ्य होने का प्रमाणपत्र लेकर चलेंगे उनको ही ट्रेन में आने की मंजूरी दी जाएगी।
- यात्रियों के बीच ट्रेन में सोशल डिस्टेसिंग के नियम का पालन करना जरूरी होगा, इसकी जवाबदेही राज्यों की होगी।