पत्रिका स्वर्णिम भारत महाअभियान में शहर को प्लास्टिक मुक्त रखने का सपना देखा गया है। इसके लिए महाशिवरात्रि में श्वि मंदिरों के पुजारियों से पहले बात की गई, व उनको इस बात के लिए तैयार किया गया कि मंदिर को प्लास्टिक मुक्त बनाने से शुरुआत हो। किस तरह इसका असर रहा, देखें यहां पर शहर के दो बत्ती स्थित हर कामना को पूरी करने वाले मनकामनेश्वर महादेव मंदिर से
रतलाम। पत्रिका स्वर्णिम भारत महाअभियान में शहर को प्लास्टिक मुक्त रखने का सपना देखा गया है। इसके लिए महाशिवरात्रि में पुजारियों से पहले बात की गई, व उनको इस बात के लिए तैयार किया गया कि मंदिर को प्लास्टिक मुक्त बनाने से शुरुआत हो। किस तरह इसका असर रहा, देखें यहां पर शहर के दो बत्ती स्थित हर कामना को पूरी करने वाले मनकामनेश्वर महादेव मंदिर से खास लाइव रिपोर्ट।
पत्रिका ने एक स्वप्न देखा है। इस स्वप्न को शहर के सहयोग के बगैर पूरा किया जाना संभव ही नहीं है। यह सपना सिर्फ पत्रिका का नहीं है, बल्कि प्लास्टिक मुक्त होना पर्यावरण की दिशा में किया जाने वाला बड़ा कदम है। त्यौहार हो या अन्य कोई बड़ा आयोजन, आइए आप व हम मिलकर यह संकल्प ले कि प्लास्टिक को ना कहेंगे। इसी विचारधारा को शहर के विभिन्न मंदिरों में सार्थक किया गया। इसकी शुरुआत गुरुवार सुबह दिगबंर जैन मुनि आचार्य पुलक सागर ने की। उन्होंने हजारों हाथ उठवाए व संकल्प दिलवाया कि प्रत्येक तीर्थ, प्रत्येक मंदिर, प्रत्येग गली, प्रत्येक चौराहे, प्रत्येक मकान को प्लास्टिक मुक्त रखेंगे।
महाशिवरात्रि पर रहे यह नजारे
शहर में महाशिवरात्रि पर पत्रिका के अभियान का विशेष असर नजर आया। शहर के विभिन्न शिवमंदिरों में जहां पूर्व में प्लास्टिक में दूध, दही, शहद, बिल्वपत्र, पुष्प आदि को ले जाते थे, वही भक्त इस बार केले के पत्ते, पान के पत्ते, कागज, रुमाल आदि में अपनी आस्था की प्रसादी ले जाते नजर आए। इतना ही नहीं, दो बत्ती स्थित सभी की कामनाओं की पुर्ति करने वाले मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में तो प्रत्येक भक्त बगैर प्लास्टिक के आया। इतना ही नहीं, अगर कोई गल्ती से प्लास्टिक लेकर आया भी तो उनको मंदिर के दरवाजे पर ही प्लास्टिक बाहर डस्टबीन में डालने की सलाह दे दी गई।