
रतलाम. मानसूनी बारिश से रतलाम तरबतर हो गया, सुबह रिमझिम के बाद देर शाम जोरदार बारिश से रतलाम के आसपास बह रहे नदी नाले उफान पर आ गए। इस कारण आवागमन बाधित हो गया। समीपस्थ ग्राम सिखेड़ी पहुंच मार्ग के मध्य गंगायता नदी पर रात 10 बजे रपट पर पानी आने से ग्रामीण दो भागों में बंट गए, रतलाम से जा रहे कई लोगों को पानी उतरने का इंतजार करना पड़ा। नदी नाले उफान पर हो तो पार न करें, सावधान रहे। रपट से पानी उतरने के बाद ही पार करें।
शहर में सुबह से मानसूनी रिमझिम बारिश ने चहुंओर ठंडक का एहसास कराया। बुदांबादी कभी तेज तो कभी फुहार सुबह 11 बजे तक बरसती रही। इसके बाद मौसम साफ होते ही, उमस ने लोगों को परेशान किया। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाकर पारा 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
पिछले साल से 8 इंच बारिश कम
भू-अभिलेख शाखा से मिली जानकारी के अनुसार 2 जुलाई की सुबह 8 बजे तक जिले औसत वर्षा 72.5 मिमी दर्ज की गई थी। जबकि पिछले साल आज दिनांक तक 268 मिमी वर्षा हो चुकी थी। गत वर्ष की तुलना इस साल अब तक 8 इंच बारिश कम है।
जिले में कहा कितनी वर्षा
रतलाम में अब तक 129 मिमी, आलोट में 125 और ताल में 98 मिमी वर्षा हो चुकी है। जावरा में 61, पिपलौदा में 50, सैलाना में 59, रावटी में 38 और बाजना में मात्र 20 मिमी वर्षा दर्ज की गई हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार आज दिनांक तक करीब 10 प्रतिशत क्षेत्र में बोवनी का अनुमान हैं।
प्राचीन लक्ष्मीनारायण मंदिर पर गिरी बिजली, एक गुंबज ध्वस्त, दो में दरारे
समीपस्थ ग्राम चोराना के शासकीय लक्ष्मीनारायण मंदिर पर गत रात आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर का एक गुंबज पूरी तरह ध्वस्त हो गया। दो अन्य गुंबजों में भी दरारें आ गई हैं। मंदिर के राम दरबार का पूरा शिखर बिखर गया। हालांकि, गर्भगृह में स्थापित लक्ष्मीनारायण, राधाकृष्ण, श्रीराम दरबार और मां अम्बे की प्रतिमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। स्वर्ण कलश, स्टैंड, धर्म ध्वजा, स्ट्रीट लाइट और लाउडस्पीकर को भी कोई क्षति नहीं पहुंची है। यह घटना गत रात करीब 10 बजे हुई। मंदिर के पुजारी मनोहरदास बैरागी है।
पीछे खेत में भी मलबा गिरा
मंदिर से मात्र 50-60 फीट दूर रहने वाले प्रदीप पांचाल ने का कहना है कि उन्होंने बिजली गिरने का धमाका तो सुना, लेकिन उन्हें गुंबज गिरने की आवाज नहीं आई। मंदिर से सटी छत दीवार और पीछे खेत में भी मलबा गिरा हैं। सूचना मिलने पर तहसीलदार प्रतिभा भाभर, पटवारी चंदू मावी ने मौका मुआयना कर पंचनामा बनाया। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि आरईएस के कर्मचारी भी आकर देखेंगे।
मंदिर के शिखर कलश, ध्वजा सुरक्षित, इलेक्ट्रानिक उपकरण जले
पांचाल ने बताया कि जिस पोल से बिजली कनेक्शन मंदिर पर जा रहा है, साथ ही उसी पोल से जुड़े पांच-सात घरों के बिजली के धमाके के बाद शॉर्ट सर्किट से पंखे और बल्ब खराब हो गए, जबकि स्वर्ण कलश, धर्म ध्वजा सुरक्षित है। यह 200 साल से अधिक पुराना मंदिर है, जिसका जीर्णोद्धार 2011 में हुआ था। इस शासकीय मंदिर के निर्माण उस समय ग्रामवासियों के सहयोग से करीब 22 से 25 लाख रुपए में हुआ था।