
रतलाम। साढ़े तीन साल से लापता बेटे को अपने सामने जीवित और स्वस्थ देखकर वृद्ध मां अपने आँसुओं को रोक न सकीं। इस भावुक मिलन को देखकर वहां उपस्थित सभी की आँखें नम हो गईं।
रतलाम के 'अपना घर आश्रम' ने मानसिक अस्वस्थता के कारण अपनों से बिछड़े बेसहारा व्यक्तियों को संबल प्रदान करने की दिशा में एक और संवेदनशील उदाहरण पेश किया है। आश्रम परिवार के अनुसार, प्रदीप की घर वापसी के साथ ही आश्रम द्वारा अब तक कुल 86 व्यक्तियों को उनके परिवारों से सुरक्षित मिलाया जा चुका है। पिछले एक माह से आश्रम में नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा और आत्मीय देखरेख प्राप्त कर रहे प्रदीप साहू (निवासी सुहागपुर, जिला नर्मदापुरम) को उनके परिजनों से सकुशल मिला दिया गया।
सेवा और इलाज देना किया शुरू
जानकारी के अनुसार, सुहागपुर निवासी प्रदीप साहू साढ़े तीन साल पहले मानसिक अस्वस्थता के चलते अचानक घर से लापता हो गए थे। परिजनों ने काफी खोजबीन की और सुहागपुर थाना में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। भटकते हुए जब प्रदीप बेसहारा स्थिति में आश्रम की टीम को मिले, तो उन्हें रतलाम स्थित 'अपना घर आश्रम' लाया गया। यहां संस्था ने उन्हें सेवा और इलाज देना शुरू किया।
डॉक्टरों और काउंसलर्स मेहनत रंग लाई
डॉक्टरों और काउंसलर्स की टीम ने प्रदीप को सामान्य स्थिति में लाने तथा उनकी पुरानी यादों को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. कपिल आर्य एवं डॉ. गौरव के पूर्ण सहयोग व मार्गदर्शन में प्रदीप का निरंतर मानसिक उपचार किया गया। इंदौर स्थित मानसिक चिकित्सालय के नर्सिंग ऑफिसर व काउंसलर जितेंद्र सुमन ने विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए। सघन काउंसलिंग के परिणामस्वरूप ही प्रदीप अपनी पुरानी यादों, नाम और घर के पते को याद करने में सक्षम हो सके।
मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास का महत्व
मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे व्यक्तियों को अक्सर समाज से अलगाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में 'अपना घर आश्रम' जैसी संस्थाएं न केवल उन्हें आश्रय और उपचार प्रदान करती हैं, बल्कि परिवार से मिलाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। उचित देखभाल, चिकित्सा और परामर्श से कई लोग अपनी याददाश्त और सामान्य जीवन को पुन: प्राप्त कर सकते हैं। यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं कितनी महत्त्वपूर्ण हैं।
पूर्ण सहयोग व मार्गदर्शन
डॉक्टरों और काउंसलर्स की टीम ने प्रदीप को सामान्य स्थिति में लाने तथा उनकी पुरानी यादों को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. कपिल आर्य एवं डॉ. गौरव के पूर्ण सहयोग व मार्गदर्शन में प्रदीप का निरंतर मानसिक उपचार किया गया। इंदौर स्थित मानसिक चिकित्सालय के नर्सिंग ऑफिसर व काउंसलर जितेंद्र सुमन ने विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए। सघन काउंसलिंग के परिणामस्वरूप ही प्रदीप अपनी पुरानी यादों, नाम और घर के पते को याद करने में सक्षम हो सके।