ट्रेन पर पत्थर मत फेंको, पुलिस के दोस्त बनो
रतलाम. ट्रेन का काम यात्री को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाना होता है। इसमे बीमार लोग बडे़ शहर में इलाज के लिए भी जाते है। जब पत्थर चलता है तो ट्रेन को रोका जाता है। इससे मरीज को इजाज मिलने में देरी होती है। बेहतर है कि रेल पुलिस व आरपीएफ के मित्र बनो व जरुरत पडे़ तब जरूरी सूचना दो। यह संदेश का प्रचार लेकर पहली बार भारतीय रेलवे के रतलाम मंडल में आरपीएफ विभिन्न स्टेशन व उसके करीब के गांव में पहुंची है। मंडल में बामनिया से लेकर दाहोद सेक्शन तक पत्थर फैकने की घटनाएं अधिक होती है इसलिए दोस्ती के विचार के साथ अभियान का नाम ऑपरेशन दोस्ती दिया गया है।
रेल मंडल में तीन वर्षो में वैसे तो एक दर्जन से अधिक बार बामनिया से दाहोद के बीच पत्थर ट्रेन पर चले है, लेकिन तीन बार इस प्रकार की घटना हुई जब चालक, गार्ड को सिर में लगी है। इसके बाद आरपीएफ ने कई बार उन सेक्शन में जहां - जहां इस प्रकार की घटना हुई, वहां पर पहुंचकर ग्रामीणों से बात की। पहली बार हो रहा है जब आरपीएफ ने दोस्ती की बात की है। अभियान की शुरुआत १२ नवंबर से हुई है। अब तक बामनिया, रावटी, भैरूगढ़, मेघनगर सहित दाहोद तक के छोटे व बडे़ रेलवे स्टेशन व उससे आसपास के 10 से 12 गांव के ग्रामीणों से संवाद कर रही है।
अपराध निंयत्रण में मदद मिलेगी
इससे अपराध निंयत्रण में तो मदद मिलेगी ही इसके साथ साथ ट्रेन व रेल पटरी के किनारे होने वाले अपराध पर अंकूश लगेगा। इसलिए ही हेल्पलाइन नंबर १८२ का प्रचार भी किया जा रहा है। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर कुछ संदिग्ध नजर आए तो सूचना जरूर करें।
- रमन कुमार, मंडल सुरक्षा आयुक्त, रतलाम रेल मंडल