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फेमस ‘शिकागो स्पीच’ से पहले MP में थे स्वामी विवेकानंद, यहां जानें पूरी रोचक कहानी

National Youth Day: स्वामी विवेकानंद के अनुसार आधुनिक सभ्यता की मांग है कि युवा उत्सर्गपूर्ण जीवन के लिये आत्म-निवेश करें। स्वामी विवेकानंद ने एमपी के इन अंचल में भ्रमण किया था। जाने पूरी कहानी ….
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Updated: 12 Jan 2026, 12:11 AM IST
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Swami Vivekananda mp visit (फोटो- Patrika.com)

Swami Vivekananda birth anniversary: स्वामी विवेकानंद की कहानी युवा-संघर्ष की कहानी है। इस लिए उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के तौर पर मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद का संघर्ष मनुष्य जाति की सम्पूर्ण विजय के लिये है। भूख, दरिद्रता, डर, जड़ता, मोह, दुर्बलता और काम-वासना के कीचड़ में भैंसे हुए मनुष्य को बाहर निकालने का एक जोरदार प्रयत्न किया था स्वामी विवेकानंद ने। (mp news)

एमपी के इन क्षेत्रों में आए थे विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद जगद्गुरु शंकराचार्य के बाद पहले ऐसे संन्यासी थे, जिन्होंने पूरा भारत भ्रमण किया। भारत भ्रमण करते हुए 1892 में वे मध्य प्रदेश के खंडवा, महेश्वर, ओंकारेश्वर और उज्जैन भी आये थे। 1892 में विवेकानंद खंडवा में हरिदास चटर्जी के यहां ठहरे थे। खंडवा में ही उन्हें शिकागो में होने वाले धर्म सम्मेलन की सूचना मिली।

धर्म सम्मेलन में जाने का निश्चय भी उन्होंने खंडवा में ही किया, लेकिन शिकागो प्रस्थान के लिये धन की व्यवस्था करना एक बड़ी भारी समस्या थी। उन्हें जूनागढ़ के दीवान ने अपने इंदौर के मित्र श्री बेदरकर के नाम एक पत्र दिया। स्वामी वह पत्र लेकर खंडवा से इंदौर आये, लेकिन बेदरकर ने न तो कोई सहायता की, न उत्साह जगाया। इंदौर से ही स्वामी महेश्वर के घाटों के दर्शन करते हुए उज्जैन पहुंचे। यहां पर उन्होंने महाकालेश्वर के दर्शन भी किए।

छत्तीसगढ़ की राजधानी में भी आए थे

स्वामी विवेकानंद वर्ष 1877 में वर्तमान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आये थे, तब उनकी उम्र 14 वर्ष थी। रायपुर के मेट्रोपॉलिटन स्कूल में उन्होंने मिडिल कक्षा तक अध्ययन किया। वे यहां दो वर्ष रहे। उन्होंने संगीत की पहली शिक्षा भी रायपुर में ही प्राप्त की। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय युवाओं से जो आह्वान किया, वह उच्चतम गुरु-शिष्य परंपरा से आया था। इतने आत्म-विश्वास के साथ अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए विवेकानंद के अतिरिक्त किसी और को हमने नहीं देखा। विवेकानंद कभी अतीत में नहीं गये।

शिक्षा का नितांत अभाव

ये सदैव वर्तमान से लड़ते हुए दिखाई दिये। हिन्दुत्व के लिये चीख-पुकार मचाने की अपेक्षा विवेकानंद ने हिन्दुत्व को चरितार्थ कर विश्व के सामने जो तस्वीर पेश की, उसने हमारे भीतर स्वाभिमान को जगाया, हमें वह आत्मविश्वास दिया, जिसकी सदियों से दरकार थी। विवेकानंद ने उपनिषदों से केवल एक छोटा सा मंत्र उठाकर दिखाया। वह मंत्र था-'अभीः। यह निर्भय हो जाने का वह मंत्र था, जिसके दम पर स्वामी विवेकानंद ने सब कठिनाइ‌यों को लाँघ कर विश्व-विजेता होने का गौरव प्राप्त किया।

स्वामी विवेकानंद ने मालवा अंचल का भ्रमण करते हुए यहां के बारे महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने लिखा है- इस अंचल में एक बात देख कर मुझे बहुत दुःख होता है, वह है शिक्षा का नितांत अभाव। देश के इस भूभाग के लोग धर्म के नाम पर जो कुछ जानते हैं वह है- खाने-पीने और नहाने को लेकर स्थानीय अंधविश्वासों की एक गठरी, बस यही उनका सारा धर्म है। हमारा देश यदि सचमुच जगद्‌गुरु कहलाने के योग्य है, तो वह केवल स्वामी विवेकानंद के कारण। स्वामी विवेकानंद के अनुसार आधुनिक सभ्यता की मांग है कि युवा उत्सर्गपूर्ण जीवन के लिये आत्म-निवेश करें। (mp news)

Updated on:
12 Jan 2026, 12:11 AM IST
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