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कुत्तों का आतंक, 15 दिन में 379 पर हमला

पलसोड़ी में तीन वर्षीय बालिका की जाने के बाद भी जिम्मेदारों की अनदेखी, सार्वजनिक स्थानों पर खतरा, शहर से गांव तक दहशत, अस्पताल में रोजाना 20-25 लोग पहुंचना आम बात
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रतलाम

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Gourishankar singh Jodha

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Updated: 24 Oct 2026, 10:01 PM IST

Dog bite news ratlam

पलसोड़ी में तीन वर्षीय बालिका की जाने के बाद भी जिम्मेदारों की अनदेखी, सार्वजनिक स्थानों पर खतरा, शहर से गांव तक दहशत, अस्पताल में रोजाना 20-25 लोग पहुंचना आम बात

रतलाम। शहर की सडक़ों से लेकर गांवों की गलियों तक आवारा कुत्तों का आतंक लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। राहगीर और वाहन चालक ही नहीं, स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है। 15 दिन में 379 लोगों पर कुत्तों ने हमला कर घायल किया, जो अस्पताल पहुंचकर उपचार करा रहे हैं।

गुरुवार शाम समीपस्थ ग्राम पलसोड़ी में कुत्तों के हमले में तीन वर्षीय बालिका मनीषा भाभर की मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। लगातार हो रहे हमलों और मौतों के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा प्रभावी नियंत्रण नहीं किए जाने से उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस माह लगाए 730 लोगों ने रेबीज के इंजेक्शन
जिला अस्पताल के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। बीते 8 से 22 अक्टूबर के बीच, कुत्तों के हमले में घायल हुए करीब 379 बच्चे और प्रौढ़ उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। इसी पंद्रह दिन की अवधि में लगभग 730 लोगों ने रेबीज के इंजेक्शन लगवाए। 23 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक भी कुत्तों के हमले में घायल 12 लोग अस्पताल पहुंच चुके थे, जबकि 31 लोग पहले से चल रहे टीकाकरण के लिए आए। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि कुत्तों के हमलों का सिलसिला अनवरत जारी है। इससे पहले भी कुत्ते के काटने के बाद रेबीज का टीका लगवाने के बावजूद शाहरुख हुसैन की मौत का मामला सामने आ चुका है। स्थानीय नागरिक प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

निर्देश कागजों पर, सडक़ों पर कुत्तों का जमावड़ा
सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों के बावजूद स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इनकी मौजूदगी बनी हुई है। ऐसे में सवाल है कि मासूमों की जान जाने और लोगों के घायल होने के बाद भी कुत्तों पर नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई कब होगी। आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से हटाने और निर्धारित नियमों के तहत रखने के निर्देश हैं। इसके बावजूद शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में कुत्ते खुलेआम घूम रहे हैं। लगातार बढ़ते हमलों के बीच निगरानी, नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं।

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