रतलाम. जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में चल रही सर्द बयार से लोग कांप रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पूर्वी ईरान के ऊपर माध्य समुद्र तल से 4.5 से 5.8 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय हैं। उत्तर-पूर्व भारत के उपर माध्य समुद्र तल से 12.6 किमी […]
रतलाम. जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में चल रही सर्द बयार से लोग कांप रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पूर्वी ईरान के ऊपर माध्य समुद्र तल से 4.5 से 5.8 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय हैं। उत्तर-पूर्व भारत के उपर माध्य समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊंचाई पर लगभग 241 किमी घंटा गति से उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवा बह रही हैं। एक नया पश्चिमी विक्षोभ के 2 फरवरी से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं।
गुरुवार सुबह फिर लोगों को कंपकंपा दिया। सुबह से चल रही सर्द बयार के कारण 3 डिग्री रात के बाद अधिकतम तापमान भी 3.8 डिग्री तक लुढक़ गया। सुबह की आद्र्रता 93 और शाम 71 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पांच सबसे न्यूनतम तापमान वाले शहर में 8.2 डिग्री सेल्सियस के साथ रतलाम भी शामिल हैं।
प्रदेश के पांच जिलों में रतलाम भी शामिल
समीपस्थ जिला मंदसौर का न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री दर्ज किया गया हैं। माह के प्रथम सप्ताह में सर्दी का असर रहा, जिसमें 4, 5 व 6 जनवरी को न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था। अधिकतम तापमान 20 डिग्री दर्ज किया था। अंतिम सप्ताह में फिर मौसम बदला सुबह से रात तक लोगों को ऊनी वस्त्रों का सहारा लेना पड़ रहा हैं, बादलों से सूर्य लुकाछिपी बनी हुई है। धूप सुहानी लगती है, लेकिन छांव परेशान कर रही हैं।
कृषि विभाग की सलाह
कृषि विभाग की ओर से मौसम विभाग की चेतावनी के संभावित प्रभाव के चलते किसानों को सलाह दी है कि लगातार कोहरा एवं अधिक आद्र्रता के कारण कोहरे की तीव्रता कम होने एवं मौसम साफ होने तक सिंचाई स्थगित रखें। सहायक संचालक भीका वास्के ने बताया कि खेतों में कीट एवं रोग के प्र्रांरभिक लक्षणों की नियमित निगरानी रखे। साफ मौसम के दौरान आवश्यकतानुसार पौध संरक्षण उपाए अपनाएं। चना फसल फूल अवस्था में होने के कारण वर्तमान में सिंचाई न करें। इल्ली की निगरानी करें।
ये रोग बढ़ सकते फसलों में
वास्के ने बताया कि मौसम में भुलका एवं चूर्णी फंफूद जैैसे रोग बढ़ सकते हैं। धूप की अवधि कम होने से प्रकाश संश्लेषण एवं फसल वृद्धि प्रभावित हो सकती हैं। अधिक नमी से खड़ी फसलों में कीटों की संख्या बढ़ सकती हैं। लम्बे समय तक नमी बने रहने से ऊंची फसलों के लॉजिंग का खतरा है।