Akshaya Tritiya 2026 : अक्षय तृतीया 2026 पर अयोध्या में 5000 मंदिरों में विशेष पूजा, गजकेसरी और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग। जानें शुभ मुहूर्त, 56 भोग, सोना खरीदने का महत्व और दान की परंपरा।
Akshaya Tritiya 2026 in Ayodhya: अयोध्या, जो पहले से ही राम लला के आगमन से सराबोर है, लेकिन अब शहर एक और खास जश्न के लिए कमर कस चुका है। 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पड़ रही है और इस बार ये तारीख सिर्फ कैलेंडर पर एक दिन भर नहीं रहेगी। रामनगरी के करीब 5000 मंदिरों में एक साथ खास पूजा-पाठ होंगे, जिसका असर सिर्फ यहां नहीं, दुनिया भर के भक्तों पर दिखेगा।
अब ज्योतिष की बात करें, तो इस अक्षय तृतीया पर योग कुछ ऐसे बन रहे हैं कि बरसों बाद ऐसा संयोग फिर आया है। पंडित और ज्योतिषी भी कह रहे हैं ग्रह-नक्षत्रों की चाल ही कुछ ऐसी है, कि जैसे बहुत समय बाद किस्मत खुद मौके दे रही हो।
गजकेसरी योग में बृहस्पति और चंद्रमा एक ही राशि में हैं, जिसे समृद्धि और तरक्की की चाबी मानते हैं। त्रिपुष्कर योग में जो शुभ काम करोगे, उसका फल तीन गुना मिलता है ऐसी मान्यता है। आयुष्मान योग भी साथ है, जो सेहत और लंबी उम्र के लिए अच्छा है। मालव्य और शश योग की वजह से खरीदारी या नया बिजनेस स्टार्ट करने वालों के लिए दिन जबरदस्त हो गया है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खास इंतजाम किए हैं। इस दिन राम लला को गर्मी से राहत देने के लिए खास सूती कपड़े पहनाए जाएंगे। श्रृंगार भी बड़े पैमाने पर होगा और 56 तरह के भोग चढ़ेंगे। वैसे तो हर दिन भगवान को भोग लगता है, लेकिन इस बार आम, खरबूजा, तरबूज जैसे खास फल भी रखे जाएंगे, ताकि गर्मी में भगवान भी ठंडक महसूस करें। यज्ञशाला में पंडित वैदिक मंत्रों के साथ हवन करेंगे। ये सब सिर्फ मंदिर में नहीं, आसपास की फिजा में भी असर डाल देगा।
मुहूर्त की बात करें, तो अक्षय तृतीया की शुरुआत 19 अप्रैल सुबह 10:50 से रहेगी और समाप्ति अगले दिन सुबह 7:28 बजे तक। पूजा और खरीदारी के लिए दोपहर का वक्त सबसे अच्छा बताया गया है।
अयोध्या की परंपरा में इस दिन की अपनी अलग अहमियत है। महंत सत्येंद्र दास वेदांती कहते हैं यह भगवान विष्णु का दिन है और श्रीराम तो स्वंय उन्हीं के रूप माने जाते हैं। यहां किसान इस दिन अपने खेतों में पूजा करते हैं और नई फसल के लिए तैयारी शुरू होती है। उनकी मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर बोया गया बीज कभी नहीं मरता।
अब बात करें खरीदारी की। इस दिन सोना खरीदने की भी खास मान्यता है कहते हैं, अक्षय तृतीया पर खरीदा गया सोना पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता है। इसलिए बाजारों में भी भारी भीड़ देखने को मिलती है। लोग जल से भरा कलश, सत्तू, छाता या पंखा दान करते हैं। इस दान से पितृ दोष मिटता है और पुण्य भी बढ़ता है।
अगर आप नया काम शुरू करना चाहते हैं या अयोध्या का अलौकिक अनुभव लेना चाहते हैं, तो 19 अप्रैल का ये मौका मत चूकिए। अयोध्या के 5000 मंदिरों की मिलीजुली घंटियां और मंत्र, उस दिन को आपके लिए यादगार बना देंगे।