
Pitru Dosh-Kaalsarp Dosh Remedies - आषाढ़ मास की अमावस्या इस बार 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार के दिन अमावस्या पड़ने से भौमवती का दुर्लभ योग रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इस दिन को बेहद खास और फलदायी माना गया है। यदि आपकी तरक्की रुकी हुई है, बनते काम बिगड़ रहे है या परिवार में बेवजह कलह का माहौल रहता है, तो यह दिन आपके लिए खास है।
ज्योतिषाचार्य हिमांशु हुकुमचंद जैन के अनुसार, यह अमावस्या मुख्य रूप से जन्म कुंडली के दो सबसे भारी दोषों पितृ दोष (Pitru Dosh) और कालसर्प दोष (Kaalsarp Dosh) के निवारण तथा पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए महाकल्याणकारी है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना के साथ श्रद्धालु दान-पुण्य भी करेंगे। अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम 06:49 बजे आरंभ होगी और 14 जुलाई दोपहर 03:12 बजे समापन होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढी अमावस्या (Bhaumvati Amavasya 2026) सिर्फ कर्मकांड का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्म-चिंतन करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करने का संकल्प है। इस दिन निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा से ईश्वर और पूर्वज दोनों प्रसन्न होकर अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। मंगलवार को सुबह उठकर अपने पूर्वजों का स्मरण करें, दान-पुण्य करें और अपने जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता को हमेशा के लिए दूर भगाएं।
पितरों की मुक्ति और सुख समृद्धि का मार्ग : मान्यता है कि इस दिन किया गया तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है। जब पितृ तृप्त होते हैं, तो वे अपनी संतान को सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
पाप नाशिनी नदी स्नान : इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में डुबकी लगाने से न केवल दैहिक, दैविक और भौतिक पापों का नाश होता है, बल्कि अशांत मन को भी अपूर्व शांति मिलती है।
दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलेगा दान : शास्त्रों में लिखा है कि अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अनाज का दान करने से दुर्भाग्य के बादल छूट जाते हैं और आध्यात्मिक उन्नति के द्वार खुलते हैं।
सबसे खास बात यह है कि आषाढ़ अमावस्या के अगले दिन 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो रही है। तंत्र-मंत्र साधना, मां दुर्गा की उपासना और विशेष सिद्धियों के लिए गुप्त नवरात्र का अपना अलग महत्व माना जाता है। ऐसे में आषाढ़ अमावस्या और गुप्त नवरात्र का यह दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। यदि इस दिन श्रद्धा, आस्था और विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाए तो पितरों का आशीर्वाद मिलने के साथ भगवान शिव, मां लक्ष्मी और शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होने की मान्यता है।