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Ganga Saptami 2026: जानें गंगा सप्तमी (23 अप्रैल) के दिन कौन से मंत्रों का जाप करें और राशि अनुसार किन चीजों का दान करें

Ganga Saptami 2026 Daan: 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जो मां गंगा के धरती पर अवतरण का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, पूजा और राशि के अनुसार दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

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Apr 21, 2026
Ganga Saptami Daan, Ganga Saptami Daan Upay
गंगा सप्तमी पर राशि अनुसार दान| Chatgpt

Ganga Saptami 2026 Daan: गंगा सप्तमी का पावन पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है, जिसे वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ तिथि 23 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा और दान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि इस दिन अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं का दान किया जाए तो ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए गंगा सप्तमी पर श्रद्धा के साथ किए गए उपाय आपके भाग्य को चमका सकते हैं।

Ganga Saptami 2026 Shubh Muhurat: गंगा सप्तमी 2026 तिथि, महत्व

गंगा सप्तमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसे मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं, जिससे संसार का कल्याण हुआ। इस वर्ष यह शुभ पर्व 23 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि 22 अप्रैल रात 10:49 बजे से शुरू होकर 23 अप्रैल रात 8:49 बजे तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के आधार पर पूजा 23 अप्रैल को ही होगी। इस दिन गंगा स्नान, दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना गया है।

Ganga Saptami 2026 Daan: राशि अनुसार दान का महत्व

  • मेष: लाल वस्त्र
  • वृषभ: चावल, चीनी, सफेद कपड़े
  • मिथुन: मूंग दाल, हरी सब्जियां
  • कर्क: दही-चीनी
  • सिंह: गेहूं, मक्का, गुड़
  • कन्या: गौशाला में हरा चारा
  • तुला: सफेद वस्त्र, चावल
  • वृश्चिक: लाल कपड़े, मसूर दाल
  • धनु: चना दाल, बेसन
  • मकर: खिचड़ी बनाकर दान
  • कुंभ: छाता, वस्त्र, जूते
  • मीन: पीले वस्त्र, बेसन लड्डू

गंगा सप्तमी के पवित्र मंत्र

इस दिन मंत्र जाप करने से मन को शांति और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।

गंगा मंत्र
"ॐ नमः शिवायै गंगायै शिवदायै नमो नमः।"

गंगा स्तोत्र
"देवि सुरेश्वरी भगवति गंगे त्रिभुवन तारिणि तरल तरंगे।
शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदयुगमे॥"

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

Updated on:
22 Apr 2026 09:01 am
Published on:
21 Apr 2026 12:17 pm