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Mahashiv Puran Katha: क्यों लेना पड़ा भगवान विष्णु को मोहिनी रूप? पढ़ें भस्मासुर के वरदान और विनाश की पूरी कहानी

Bhasmasur Story : महाशिवपुराण में वर्णित भस्मासुर की कथा बताती है कि कैसे भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार (Mohini Avatar) लेकर शिवजी को संकट से बचाया। जानिए भस्मासुर के वरदान, अहंकार और उसके विनाश की पूरी कहानी।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jun 15, 2026

Bhasmasur Story, Vishnu Mohini Avatar

Vishnu Mohini Avatar : भस्मासुर कथा: क्यों भगवान विष्णु को लेना पड़ा मोहिनी अवतार? (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Shiv and Bhasmasur Story: महाशिवपुराण में वर्णित भस्मासुर की कथा सनातन धर्म की सबसे चर्चित पौराणिक घटनाओं में से एक मानी जाती है। कठोर तपस्या से भगवान शिव से वरदान पाने वाले भस्मासुर (Bhasmasur Story) ने उसी शक्ति का प्रयोग शिवजी पर करने का प्रयास किया। तब सृष्टि के संतुलन को बचाने के लिए भगवान विष्णु को मोहिनी अवतार (Vishnu Mohini Avatar) लेना पड़ा। यह कथा अहंकार, शक्ति और विवेक का गहरा संदेश देती है।

भगवान शिव पर ही क्यों टूट पड़ा भस्मासुर

वरदान प्राप्त करते ही भस्मासुर के भीतर छिपा असुरत्व और अहंकार जाग्रत हो उठा। उसने मर्यादा की स्थापित सीमाओं को लांघते हुए स्वयं भगवान शिव पर ही उस शक्ति का परीक्षण करने का दुस्साहस किया। यह दृश्य ब्रह्मांड के इतिहास में अभूतपूर्व था दाता स्वयं अपनी ही दी हुई शक्ति से बचने के लिए भाग रहा था और याचक विनाशक बनकर उसके पीछे था।

इस विकट संकट ने स्पष्ट किया कि जब कुपात्र को असीमित अधिकार मिल जाते हैं, तो वह समाज और अपने शुभचिंतकों के लिए ही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। संपूर्ण देवलोक इस अमर्यादित कृत्य से कांप उठा और अंततः सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मोहिनी अवतार लेकर कैसे विष्णु ने बचाई सृष्टि

इस भयंकर संकट के निवारण हेतु श्रीहरि विष्णु ने अत्यंत मनमोहक मोहिनी का रूप धारण किया। स्वर्णिम आभा, लहराते केश और सम्मोहक मुस्कान से सुसज्जित मोहिनी ने जब भस्मासुर के समक्ष नृत्य का निमंत्रण रखा, तो वह राक्षस अपनी सुध-बुध खो बैठा। मोहिनी के हर कदम में माया थी और हर भंगिमा में एक मीठा भ्रम था।

भस्मासुर इस सौंदर्य के पाश में ऐसा बंधा कि वह मोहिनी की हर एक मुद्रा को हूबहू दोहराने लगा। इसी नृत्य-क्रम में जब मोहिनी ने चतुराई से अपना हाथ अपने मस्तक पर रखा, तो मदहोश भस्मासुर ने भी बिना सोचे-समझे अपना ही हाथ अपने सिर पर रख लिया। क्षण भर में उसका विशाल शरीर भीषण अग्नि की लपटों में घिर गया और वह अपने ही वरदान की आग में जलकर राख का ढेर बन गया।

भागवत पुराण में क्या है वृकासुर की कथा

भस्मासुर की यह कथा केवल शिवपुराण तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंध के अष्टासीवें (88वें) अध्याय में भी इसका सविस्तार वर्णन मिलता है। भागवत पुराण में इस असुर को वृकासुर के नाम से भी संबोधित किया गया है, जो शकुनी का पुत्र था। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह कथा केवल एक राक्षस के वध की नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर छिपे अहंकार रूपी भस्मासुर की पहचान करने का माध्यम है।

दार्शनिक संदेश:

मोहिनी शब्द मोह से बना है। जब व्यक्ति किसी वस्तु या शक्ति के प्रति अत्यधिक अंधा (मोहित) हो जाता है, तो उसका विवेक नष्ट हो जाता है और वह स्वयं ही अपना विनाश कर बैठता है।

आधुनिक समय में क्या है भस्मासुर कथा का संदेश

आज के परिप्रेक्ष्य में परमाणु हथियार, अनियंत्रित तकनीक और पर्यावरण का अंधाधुंध दोहन आधुनिक भस्मासुर के समान हैं। यदि इन शक्तियों पर नैतिक नियंत्रण और विवेक का अंकुश नहीं लगाया गया, तो मानव सभ्यता स्वयं के ही बनाए वरदानों से भस्म हो जाएगी।

इस प्रकार, अंततः मोहिनी रूपी श्रीहरि ने सिद्ध किया कि सत्य और विनम्रता ही इस चराचर जगत की सबसे बड़ी और शाश्वत शक्तियां हैं। अमरुत्व की चाह रखने वाला एक शक्तिशाली राक्षस अपने ही घमंड की आग में जलकर इतिहास के पन्नों में एक चेतावनी बनकर रह गया। यह कहानी हमें सिखाती है कि शक्ति चाहे आध्यात्मिक हो, राजनीतिक हो या आर्थिक, यदि उसके साथ मर्यादा और लोक-कल्याण की भावना नहीं है, तो उसका अंत भस्मासुर की तरह होना निश्चित है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।