Gangaur Festival 2026: Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi : गणगौर 2026 कब है – 20 या 21 मार्च? जानें गणगौर की सही तिथि, तृतीया मुहूर्त, पूजा विधि, सिंजारा, घुड़ला और राजस्थान के इस खास त्योहार की परंपराएं।
Gangaur 2026 Kab Hai : राजस्थान की संस्कृति का जिक्र होते ही दिमाग में रंग-बिरंगे कपड़े, लोकगीत, और ढेर सारी परंपराएँ घूमने लगती हैं। इन्हीं में से एक है गणगौर राजस्थान का सबसे दिल से जुड़ा त्योहार। ये बस कोई पूजा नहीं, बल्कि बेटियों की दुआओं और सुहागिनों की प्रार्थनाओं का त्योहार है। बेटियां अच्छा जीवनसाथी मांगती हैं और विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए भगवान से फरियाद करती हैं।
2026 में एक बार फिर राजस्थान की गलियों में गोर ए गणगौर माता खोल किवाड़ी जैसे गीत गूंजेंगे। तो चलिए, जानते हैं इस बार कब है गणगौर और क्यों सब इसे इतना खास मानते हैं।
गणगौर होली के अगले ही दिन से शुरू हो जाता है। अठारह दिन तक चलता है, लेकिन असली पूजा चैत्र शुक्ल तृतीया को होती है।
(ध्यान रहे, सूर्योदय के हिसाब से आपके शहर में टाइम थोड़ा बदल सकता है)
गणगौर नाम ही बता देता है गण यानी शिव, गौर यानी पार्वती। ये त्योहार उनके प्रेम, साथ और फिर मिलने का प्रतीक है। माना जाता है, पार्वती ने कठोर तप करके शिव को पाया था।
क्या आपको पता है, गणगौर सिर्फ राजस्थान में ही नहीं, बल्कि जहां-जहां राजस्थानी लोग बसे हैं, वहां भी खूब धूमधाम से मनाया जाता है? कोलकाता, गुजरात और देश के कई शहरों में इस दिन मेले-सा माहौल रहता है। खासतौर पर उदयपुर की गणगौर घाट की सवारी और जयपुर का जुलूस तो पूरी दुनिया में फेमस है।
राख से हरियाली: होली की राख में जौ बोए जाते हैं, जिन्हें जंवारे कहते हैं। ये हरियाली और खुशहाली की निशानी हैं।
मिट्टी के ईसर-गौर: लड़कियां और महिलाएं मिट्टी से शिव-पार्वती की छोटी मूर्तियां बनाती हैं। कुछ घरों में लकड़ी की पुरानी मूर्तियों को ही हर साल रंग-रोगन करके फिर से सजाया जाता है।
घुड़ला की परंपरा: अविवाहित लड़कियां सिर पर छेद वाला दीया रखकर घर-घर घूमती हैं इसे घुड़ला कहते हैं। इसका मतलब है बुराई पर अच्छाई की जीत।
सिंजारा: पूजा से एक दिन पहले मायके से गहने, कपड़े, मिठाई आती हैं इसे सिंजारा कहते हैं। ये दिन औरतों के लिए बेहद खास होता है।
कहते हैं, एक बार माता पार्वती और शिव घूमने निकले। उनके पीछे हर वर्ग की स्त्रियां चल पड़ीं। पार्वती जी ने अपनी उंगली चीरकर उसमें से निकले रक्त को सभी महिलाओं पर छिड़क दिया। इसी से उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान मिला। तभी से महिलाएं गणगौर पर अपने परिवार की खुशहाली और पति की लंबी उम्र की दुआ करती हैं।
अगर इस बार आप गणगौर मना रही हैं, तो याद रखें ये सिर्फ व्रत का नहीं, बल्कि सजने-संवरने और खुशियां बांटने का मौका है। घेवर, मेहंदी, नए कपड़े सबका मजा लें, दिल से जिएं ये त्योहार।
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