
Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर 56 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग (फोटो सोर्स- Chatgpt)
Buddhaditya Shash Hans Rajyog: देशभर में गुरु शिष्य की परंपरा का महापर्व गुरु पूर्णिमा पर्व 29 जुलाई (Guru Purnima 2026) को मनाया जाएगा। बता दें कि सनातन धर्म में आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का पर्व गुरु पूर्णिमा के रूप में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में यह पर्व गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन अपने गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त कर उनका पूजन किया जाता है।
पंडित दिनेश शास्त्री ने बताया कि वैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6.18 बजे से शुरू होगी। इसका समापन 29 जुलाई को रात 8.05 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन सत्यनारायण व्रत और गुरु पूजन का उत्तम समय सुबह 5.41 से 9.47 बजे तक रहेगा। इस दौरान गुरु का पूजन, मंत्र जाप और कथा पाठ करना अत्यंत फलदायी साबित होगा।
पं. राकेश शास्त्री के अनुसार सनातन परंपरा में भगवान शिव को आदिगुरु माना गया है। उन्होंने सप्तऋषियों सहित अनेक ऋषि-मुनियों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया था। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी गुरु परंपरा की महत्ता को दर्शाता है। इस दिन मंदिरों, आश्रमों और मठों में गुरु पूजन, व्यास पीठ पूजन, गुरु पादुका पूजन, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान करते है। उन्होंने बताया कि संत-महात्मा इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत करते हैं। चातुर्मास के दौरान संत एक स्थान पर रहकर साधना, सत्संग, प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमेश अवस्थी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर इस बार ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो पिछले 56 वर्षों बाद देखने को मिलेगा। इस बार गुरु पूर्णिमा पर सूर्य और बुध की युति से शक्तिशाली बुधादित्य राजयोग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही शश राजयोग और हंस राजयोग जैसे शुभ संयोग भी प्रभावी रहेंगे। इन बड़े राजयोगों के एकसाथ 24 मिलने से बौद्धिक क्षमता, कॅरियर 14 में तरक्की और मान-सम्मान में ** वृद्धि के योग बन रहे हैं।
धर्मशास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश और साक्षात परमब्रह्म के समान माना गया है। गुरु ही अपने शिष्य को सही मार्ग दिखाकर उसके जीवन को सफल बनाता है। कहा जाता है कि मनुष्य अपने प्रयासों से कई बार वह कार्य नहीं कर पाता जो गुरु की कृपा, मार्गदर्शन और आशीर्वाद से संभव हो जाता है। तीनों लोकों और समस्त सृष्टि में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को ज्ञान देकर सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
Updated on:
27 Jul 2026, 10:07 AM IST
Published on:
27 Jul 2026, 10:06 AM IST
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