
Gangaur Puja Samagri List : गणगौर के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और खास मुहूर्त में पूरी रीति-रिवाज से गणगौर की पूजा करती हैं। वैसे ये पर्व 18 दिन तक चलता है, लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन होता है, जो इस बार 21 मार्च को पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि इस दिन को बड़ी गणगौर भी कहते हैं। महिलाएं पूजा के लिए बालू और मिट्टी से शिव-पार्वती यानी ईसर-गौरा की मूर्ति बनाती हैं, उन्हें सजाती हैं और फिर गीत गाती हुई पूजा करती हैं। तो चलिए, जानिए पूजा में कौन-कौन सी चीजें लगती हैं।
तृतीया तिथि प्रारम्भ – 20 मार्च को मध्य रात्रि 2:30 मिनट पर
तृतीया तिथि समाप्त – 21 मार्च को रात 11:56 मिनट पर
उदया तिथि को मानते हुए गणगौर का पर्व 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा और इसी दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:49 मिनट से सुबह 05:36 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:04 मिनट से दोपहर 12:52 मिनट तक
ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि गणगौर पर देवी पार्वती की भी विशेष पूजा करने का विधान है। तीज यानी तृतीया तिथि की स्वामी गौरी हैं। इसलिए देवी पार्वती की पूजा सौभाग्य सामग्री से करें। सौलह श्रृंगार चढ़ाएं। देवी पार्वती को कुमकुम, हल्दी और मेंहदी खासतौर से चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही अन्य सुगंधित सामग्री भी चढ़ाएं।
गणगौर के दिन महिलाएं मैदा, बेसन या आटे में हल्दी मिलाकर माता पार्वती के लिए गहनों की तरह छोटी-छोटी चीजें बनाती हैं। इन्हें 'गुने' कहा जाता है। मान्यता है कि जितने गुने माता को अर्पित किए जाते हैं, परिवार में उतना ज्यादा धन और खुशहाली आती है। पूजा के बाद ये गुने महिलाएं अपनी सास, ननद, देवरानी या जेठानी को दे देती हैं।
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