
Garuda Purana: हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को जीवन, मृत्यु और कर्मों के फल से जुड़ा महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्म ही उसके अगले जन्म का स्वरूप तय करते हैं। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे कर्म भी बताए गए हैं, जिन्हें करने वाले लोगों को अगले जन्म में कौए का जन्म मिल सकता है। इसलिए गरुड़ पुराण में इन गलत आदतों से बचने की चेतावनी दी गई है, ताकि व्यक्ति अपने कर्मों को सुधारकर बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ सके।
गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए। अच्छे कर्म व्यक्ति को उच्च योनि और सुखद जीवन की ओर ले जाते हैं, जबकि बुरे कर्म उसे निम्न योनियों में जन्म लेने के लिए बाध्य कर सकते हैं।यही कारण है कि इस ग्रंथ में दैनिक जीवन से जुड़े कई छोटे-छोटे व्यवहारों के बारे में भी चेतावनी दी गई है। इनमें से एक व्यवहार है बिना निमंत्रण के किसी के घर या भोज में पहुंच जाना।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति बिना बुलावे के किसी के घर पहुंच जाता है या शादी-ब्याह, उत्सव या भोज में बिना निमंत्रण के जाकर भोजन करता है, तो इसे अनुचित व्यवहार माना गया है।शास्त्रों के अनुसार ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में कौए की योनि प्राप्त करता है। इसका अर्थ केवल दंड नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी है।
कौआ अक्सर घरों की मुंडेर पर बैठकर आवाज करता है। भारतीय परंपरा में माना जाता है कि जब कौआ बार-बार “कांव-कांव” करता है, तो यह किसी अतिथि के आने का संकेत हो सकता है।गरुड़ पुराण इस विश्वास को एक प्रतीक के रूप में समझाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति पिछले जन्म में बिना बुलाए दूसरों के घर पहुंचता था, उसे अगले जन्म में कौआ बनकर पहले से सूचना देनी पड़ती है कि कोई आने वाला है, ताकि घर का मालिक उसकी तैयारी कर सके।
बचपन में अक्सर दादी-नानी कहती थीं कि “मुंडेर पर कौआ बोल रहा है, जरूर कोई मेहमान आने वाला है।” यह केवल एक लोकविश्वास नहीं बल्कि हमारे धर्मग्रंथों में बताए गए संदेश से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।