Happy Married Life Rules: सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं। इन्हें फॉलो कर आप लाइफटाइम खुशनुमा शादीशुदा जिंदगी जी सकते हैं।
Happy Married Life Rules: सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शास्त्र कुछ जरूरी नियम अपनाने को कहते हैं, क्योंकि विवाह सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं होता। यह दो परिवारों और आत्माओं का जुड़ाव होता है। यदि आप शादीशुदा हैं या आपकी शादी होने वाली है, तो कुछ बातों को अपनाकर आप अपने रिश्ते को हमेशा के लिए टूटने से बचा सकते हैं और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
तुलसीदास जी रामचरितमानस में लिखते हैं कि सच्चे जीवनसाथी की पहचान सुख में नहीं बल्कि दुख की घड़ी में होती है। भगवान राम और माता सीता का रिश्ता हमें सिखाता है कि पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए। यानी वे एक-दूसरे को पूरा करते हैं। सच तो ये है, विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे का हाथ थामे रखना ही असली प्रेम है।
ऋग्वेद के विवाह सूक्त में कहा गया है कि पति-पत्नी एक रथ के दो पहियों की तरह होते हैं। यदि दोनों के बीच सामंजस्य (Tuning) नहीं है, तो जीवन की गाड़ी पटरी से उतर सकती है। एक-दूसरे के मन की बात सुनना और विचारों की कद्र करना ही लंबी शादी का राज है। संवाद (Conversation) कर एक-दूसरे को समझें और प्यार से समझाएं। यह स्वस्थ रिश्ते (Healthy Realtionship) का सीक्रेट है।
महाभारत काल की विदुर नीति कहती है, रिश्ते में कड़वाहट का सबसे बड़ा कारण भाषा होती है। कठोर शब्द और घमंड सुखी घर-पिरवार को भी बर्बाद कर सकते हैं। जिस घर में महिलाओं की इज्जत होती है और पुरुष अपनी जिम्मेदारी समझता है, वहां हमेशा बरकत रहती है। शास्त्र तो "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः" की बात करते हैं। यानी जहां नारियों को पूजा जाता है, वहां देवताओं का वास होता है।
अक्सर नए जोड़े (Couples) जोश में आकर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बाद में भारी पड़ सकती हैं:
शारीरिक बंधन नहीं आध्यात्मिक संबंध है शादी
शादी को केवल शारीरिक आकर्षण न समझें, बल्कि इसे एक आध्यात्मिक सफर मानें। त्याग, वफादारी, आपसी सम्मान और वाणी का संयम ही वो चाबी है, जिससे आप मैरिड लाइफ की खुशियों के ताले हमेशा के लिए खोल सकते हैं।